कोरिया के सुगंधित ‘जीराफूल’ चावल को मिल रही नई वैश्विक पहचान: प्राकृतिक खेती और एफपीओ मॉडल से संवर रही किसानों की तकदीर

कोरिया 18 अगस्त : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का पारंपरिक, औषधीय गुणों से भरपूर और अपनी सोंधी खुशबू के लिए विख्यात ‘जीराफूल चावल’ अब स्थानीय सीमाओं को लांघकर एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभर रहा है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की दूरदर्शी सोच तथा किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के प्रभावी क्रियान्वयन से जीराफूल धान की खेती को एक नया आयाम मिला है, जिससे अन्नदाताओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
प्राकृतिक खेती का कमाल: 832 किसान अपना रहे जैविक तकनीकें
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के कुशल मार्गदर्शन और कृषि विभाग के अथक प्रयासों से कोरिया जिले में आज 832 प्रगतिशील किसान पूरी तरह से प्राकृतिक खेती पद्धति के जरिए जीराफूल धान का बंपर उत्पादन कर रहे हैं।
रासायनिक खादों और कीटनाशकों से दूरी बनाते हुए ये किसान पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल और पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं:
- जैव-आधारित इनपुट: खेतों में रासायनिक यूरिया-डीपी के स्थान पर जीवामृत और बीजामृत जैसे पूरी तरह प्राकृतिक घटकों का प्रयोग किया जा रहा है।
- मिट्टी की सेहत में सुधार: इस पद्धति से न केवल चावल की गुणवत्ता और उसकी प्राकृतिक खुशबू में निखार आया है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित और मजबूत हो रही है।
- पीजीएस प्रमाणन: उत्पादित जीराफूल धान को ‘पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन’ से जोड़ने की पुख्ता तैयारी है, जिससे बाजार में इसकी विश्वसनीयता और मांग कई गुना बढ़ जाएगी।
खेत से बाजार तक: एफपीओ बना किसानों का सबसे बड़ा संबल
पारंपरिक खेती में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलना और बिचौलियों का हस्तक्षेप होता है। कोरिया में इस समस्या का स्थायी समाधान ‘सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित’ (एफपीओ) के रूप में सामने आया है।
यह एफपीओ अब किसानों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित कड़ी बन चुका है:
- एकत्रीकरण से विपणन तक: किसानों की उपज को एक मंच पर एकत्र कर उसका आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- ब्रांडिंग और पैकेजिंग: पारंपरिक जीराफूल चावल को अब आकर्षक और प्रीमियम पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे ग्राहकों का यह पहली पसंद बन रहा है।
- सामूहिक सौदेबाजी: एफपीओ के माध्यम से किसानों को अब स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े और संगठित बाजारों तक सीधी पहुंच मिल रही है, जिससे उन्हें उनकी मेहनत का वास्तविक और बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
राष्ट्रीय फलक पर सराहा गया कोरिया का मॉडल
कोरिया जिले के इस अभिनव ‘उत्पादन से मूल्य संवर्धन और बाजार तक’ के सक्सेस मॉडल की गूंज अब देश की राजधानी तक पहुंच चुकी है।
- केंद्रीय सराहना: भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से कोरिया के इस जीराफूल प्राकृतिक खेती और एफपीओ मॉडल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई है।
- मुख्यमंत्री का प्रोत्साहन: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी कोरिया के किसानों की इस अनूठी पहल की भरपूर सराहना की है। उन्होंने कहा है कि पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और मजबूत विपणन तंत्र से जोड़ने से राज्य के किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं।
कृषि विभाग का स्पष्ट विजन: हर किसान को मिले उसकी उपज का हक
कृषि विभाग के उप संचालक श्री राजेश भारती के अनुसार, विभाग लगातार किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है। चाहे वह खेत तैयार करने की विधि हो, जैव-इनपुट का निर्माण हो या फिर एफपीओ के जरिए पैकेजिंग और मार्केटिंग—किसानों को हर कदम पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
निष्कर्ष: जीराफूल चावल की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक प्रबंधन और प्रशासनिक इच्छाशक्ति मिल जाती है, तो कृषि लाभ का सौदा बन जाती है। कोरिया का यह मॉडल आज पूरे राज्य और देश के किसानों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है, जहां खेत की खुशबू अब सीधे बाजार की चमक बन रही है।
