छत्तीसगढ़ राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड की 26वीं बैठक: 45 अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप, खनिज संपदा को मिलेगा नया आयाम

रायपुर 20 अगस्त : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पुराना सर्किट हाउस में खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद की अध्यक्षता में राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हुए भूवैज्ञानिक एवं खनिज अन्वेषण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज कार्यक्रमों एवं प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में विशेष सचिव एवं संचालक भौमिकी-खनिकर्म श्री रजत बंसल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के उप महानिदेशक श्री अमित धरवाड़कर सहित विभिन्न केंद्रीय, राज्य एजेंसियों और निजी उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्रमुख बिंदु एवं उपलब्धियाँ:
- 45 अन्वेषण परियोजनाओं पर मुहर: आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कुल 45 नई व जारी अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 35 क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक (सामरिक) खनिज ब्लॉक, 4 डीप-सीटेड (गहन स्तर) खनिज ब्लॉक, तथा 6 बल्क मिनरल (थोक खनिज) परियोजनाएं शामिल हैं।
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की बड़ी भूमिका: स्वीकृत परियोजनाओं में से 25 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन GSI (रायपुर इकाई) द्वारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म द्वारा राज्य स्तर पर 11 अन्वेषण प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनमें 1 ग्रेफाइट, 2 चूना पत्थर, 4 लौह अयस्क, 2 ग्लॉकोनाइट, 1 आरईई (REE) एवं रेयर मेटल्स, और 1 बॉक्साइट व एल्युमिनस लेटराइट ब्लॉक शामिल हैं।
- अभूतपूर्व खनिज संसाधन की स्थापना: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा शानदार प्रदर्शन करते हुए 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर और 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क के नए संसाधनों की पहचान कर उनकी स्थापना की गई है।
- रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण: बैठक में यह जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन रॉयल्टी और राजस्व से राज्य को लगभग 16,738 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड प्राप्ति हुई है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
सामरिक खनिजों और उन्नत तकनीकों पर जोर
सरकार का मुख्य फोकस भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई (Rare Earth Elements), ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे दुर्लभ व बहुमूल्य खनिजों पर है। दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण की गति को और तेज करने के साथ-साथ अधिक गहराई में मौजूद (Deep-seated) खनिजों का सटीक आकलन करने के लिए अत्याधुनिक एवं उन्नत तकनीकों को अपनाने का निर्देश दिया गया है।
पाँच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र सौंपे
बैठक के दौरान GSI द्वारा छत्तीसगढ़ के पाँच जिलों के अद्यतन खनिज संसाधन मानचित्र आधिकारिक तौर पर खनिज साधन विभाग को सौंपे गए। साथ ही, केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने और राज्य में खनिज-आधारित उद्योगों की मांग के अनुसार एक ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया गया।
बैठक में इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC), सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, सीएमपीडीआईएल, एमओआईएल, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के अधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CGCiSST), अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों तथा उद्योग जगत से जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड एवं माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
