छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था का कायापलट: गुणवत्ता, पारदर्शिता और विद्यार्थी-केंद्रित सुधारों की दोहरी छलांग

रायपुर, 21 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने बीते दो वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम, अटल नगर, नवा रायपुर में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से पिछले दो वर्षों के कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के प्रावधानों के अनुरूप अधोसंरचना विस्तार, शिक्षक भर्ती, बहुभाषी शिक्षा और डिजिटल मॉनिटरिंग के क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए हैं।
1. शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती और पदोन्नति से दूर हुई किल्लत
शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए मानव संसाधन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां और पदोन्नतियां की गई हैं:
- युक्तियुक्तकरण (Rationalisation): नियमों के तहत 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया, जिससे 15,165 शिक्षकों व प्राचार्यों को सही जगह पदस्थ किया गया। इसके तहत 453 शिक्षकविहीन और 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की मुकम्मल व्यवस्था की गई।
- बंपर पदोन्नतियां: विगत दो वर्षों में टी और ई संवर्ग मिलाकर कुल 2,813 प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। इसके अलावा 1,798 व्याख्याताओं सहित कुल 7,000 से अधिक विभिन्न पदों पर पदोन्नतियां दी गईं।
- ऑनलाइन सीबीटी (CBT) भर्ती: स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पहली बार कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा (सीबीटी) प्रणाली शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत 3,066 संविदा पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। कुल मिलाकर 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की जा चुकी है और 5,000 अन्य पदों पर प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
2. नई शिक्षा नीति और स्थानीय भाषाओं में नवाचार
बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत और सहज बनाने के लिए स्थानीय बोलियों और आधुनिक तकनीकों का अनूठा समन्वय किया गया है:
- बहुभाषी शिक्षा: छत्तीसगढ़ ‘भाषा-चित्रण’ (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बस्तर और सरगुजा संभागों में हजारों शिक्षकों को द्विभाषीय शिक्षण के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। कक्षा 1 से 3 तक के लिए छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी में पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं।
- एनसीईआरटी अनुकूलन: कक्षा 1 से 3 और कक्षा 6 के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का अनुकूलन किया गया है। साथ ही, कक्षा 1 और 2 की हिंदी पुस्तकों में ‘बारहखड़ी’ को पुनः शामिल किया गया है।
3. तकनीक-आधारित प्रशासनिक डिजिटलीकरण और विद्या समीक्षा केंद्र
शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए डिजिटल पहलों को प्राथमिकता दी गई है:
- ऑनलाइन उपस्थिति: आधार-आधारित बायोमेट्रिक और ‘टीके ऐप’ (Tee Kay App) के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 85% शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन सुनिश्चित हो रही है।
- एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र: शिक्षा व्यवस्था की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक विद्या समीक्षा केंद्र बनाया गया है। कॉल सेंटर के जरिए 1 लाख से अधिक फीडबैक कॉल्स लिए गए हैं। बारकोड आधारित पाठ्यपुस्तक ट्रैकिंग से शासन को लगभग 40 करोड़ रुपये की बड़ी बचत हुई है।
4. विद्यार्थियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं
- निःशुल्क सामग्री व साइकिल: सत्र आरंभ होने से पूर्व 45 लाख से अधिक विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, 1 लाख 62 हजार से अधिक बालिकाओं को ‘सरस्वती साइकिल योजना’ का लाभ और 28 लाख से अधिक बच्चों को निःशुल्क गणवेश वितरित किए गए।
- शनिवार बैग-रहित दिवस: बच्चों के समग्र विकास के लिए हर शनिवार को तनावमुक्त माहौल में खेल, योग, लोककला और नैतिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां कराई जा रही हैं।
- अधोसंरचना का विस्तार: पिछले तीन वर्षों में 504 नवीन विद्यालयों और 2,583 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई है। बजट 2026-27 के तहत 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
5. बस्तर और विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के लिए विशेष फोकस
- नियत नेल्ला नार योजना: बस्तर संभाग के 6 जिलों के 97% गांवों में प्राथमिक शालाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है। बंद पड़े 48 विद्यालयों को फिर से खोला गया है तथा 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाई जा रही है।
- आवासीय सुविधाएं: प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए 13 जिलों में 40 नए पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे आदिवासी अंचलों के बच्चों को बेहतर भविष्य गढ़ने का सुअवसर मिल रहा है।
निष्कर्ष: शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि इन तमाम दूरदर्शी पहलों का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के हर वर्ग और दूरस्थ अंचल के विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करना है, जिससे राज्य का भविष्य और अधिक सशक्त हो सके।
