मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन

रायपुर, 24 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में आयोजित गरिमामयी समारोह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के बहुचर्चित उपन्यास ‘कोहरा’ का औपचारिक विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहित्य को समाज का सजग प्रहरी बताते हुए कहा कि ‘कोहरा’ जैसी रचनाएं सामाजिक विमर्श को नया आयाम देने और सच को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु एवं मुख्य बातें
- साहित्य और सामाजिक चेतना: मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषयों पर लेखन के लिए अदम्य साहस की आवश्यकता होती है। जब रचनाकार समाज की वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सच्ची सामाजिक चेतना का रूप ले लेता है।
- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा: प्रदेश की गौरवशाली विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने देश को विनोद कुमार शुक्ल (ज्ञानपीठ सम्मानित), मुक्तिबोध और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे मूर्धन्य रचनाकार दिए हैं, जिनकी परंपरा को आज की युवा पीढ़ी सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही है।
- सिनेमा और साहित्य की तर्ज पर साहसिक लेखन: ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्मिक व कड़े विषयों को उठाने पर विरोध के स्वर उठना स्वाभाविक है, लेकिन एक सच्चे रचनाकार का दायित्व है कि वह बिना डरे अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ सच को समाज के समक्ष रखे।
- हर घर में हो लाइब्रेरी: मुख्यमंत्री ने पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि हर घर में छोटी लाइब्रेरी होनी चाहिए। पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सबसे मजबूत सेतु हैं।
नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को दें अभिव्यक्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के रचनाकारों से विशेष आह्वान किया कि वे नक्सलवाद की अनकही पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का मुख्य विषय बनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। बस्तर अब शांति और विकास के नए दौर की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेलने वाले निर्दोष परिवारों के दर्द, बच्चों के प्रभावित भविष्य और बदलते बस्तर की इस गाथा को साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाएं।
वक्ताओं के विचार
- श्री सुनील गंगाराम गर्ग (मुख्य वक्ता): भारत की संस्कृति सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने ‘कोहरा’ को समकालीन विषयों पर आधारित एक अत्यंत प्रासंगिक कृति बताया।
- श्री शशांक शर्मा (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी): वर्तमान समय विचारों के संवाद का है और ‘कोहरा’ जैसी कृतियां पाठकों को आत्ममंथन का अनूठा अवसर देती हैं।
- श्री प्रभात मिश्रा (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग): यह उपन्यास केवल समस्याओं को उजागर नहीं करता, बल्कि समाधान की दिशा में सोचने के लिए भी प्रेरित करता है।
- श्री गिरीश पंकज (वरिष्ठ साहित्यकार): ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि यह उपन्यास सामाजिक ज्वलंत प्रश्नों के साथ-साथ नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या को भी सशक्त अभिव्यक्ति देता है।
समारोह में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, श्री जलज कुमार अनुपम सहित बड़ी संख्या में प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
