छत्तीसगढ़ में कृषि का महाअभियान: 97% बोनी पूरी, किसानों में उत्साह; रिकॉर्ड 7778 करोड़ का अल्पकालीन ऋण वितरित
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खाद-बीज की सुगम आपूर्ति और सतत निगरानी का दिख रहा असर
- राज्य में अब तक 47.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लहलहाई फसलें, धान के साथ मिलेट्स और दलहन-तिलहन की बुवाई जोरों पर
- सहकारी और निजी क्षेत्रों में खाद का पर्याप्त भंडारण, 12.07 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों तक पहुंचा
- पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक हुई बारिश, 839.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज

रायपुर, 25 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून की सक्रियता और राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों के चलते खेती-किसानी का कार्य परवान पर है। राज्य के अन्नदाताओं ने कृषि के क्षेत्र में एक और नया मील का पत्थर छूते हुए निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंच 97 प्रतिशत बोनी का कार्य सफलतापपूर्वक पूरा कर लिया है। कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 में कुल 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 47.40 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी पूरी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री की कड़ी मॉनिटरिंग और सुगम व्यवस्था का लाभ
किसानों को खेती-किसानी में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पहले ही स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, राज्य के सभी किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सरलता से प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सोसायटियों में खाद-बीज के पर्याप्त भंडारण की सतत निगरानी की जा रही है, और वितरण व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी का असर मैदानी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारी पूरी मुस्तैदी से इस व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
आंकड़ों के आईने में छत्तीसगढ़ की कृषि प्रगति:
- बोनी का रकबा (97% कार्य पूर्ण): इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 47.40 लाख हेक्टेयर में बोनी हो चुकी है। धान के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी पारंपरिक व दलहन-तिलहन फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। खेती का प्रारंभिक कार्य अब अपने अंतिम चरण में है।
- उर्वरक वितरण (12.07 लाख मीट्रिक टन): प्रदेश में इस सीजन 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य था। इसके विपरीत, सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 16.67 लाख मीट्रिक टन का बंपर भंडारण किया गया है। अब तक किसानों को 12.07 लाख मीट्रिक टन (लक्ष्य का 72%) उर्वरक वितरित किया जा चुका है, जिससे खाद की किल्लत की सभी अफवाहों पर विराम लग गया है।
- प्रमाणित बीजों का वितरण (93% मांग पूरी): बीज निगम द्वारा 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया था। इसके विरुद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.58 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले बीज किसानों को बांटे जा चुके हैं, जो कुल मांग का 93 प्रतिशत है।
- अल्पकालीन कृषि ऋण में ऐतिहासिक उछाल (7778.76 करोड़ रुपए): राज्य सरकार द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। चालू खरीफ सीजन में 24 अगस्त तक 7778.76 करोड़ रुपए का अल्पकालीन ऋण वितरित किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि (6449.95 करोड़ रुपए) की तुलना में काफी अधिक है। इस वर्ष कुल 8800 करोड़ रुपए ऋण वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।
संतोषजनक बारिश से फसलों को मिल रहा जीवनदान
मौसम के मोर्चे पर भी छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अच्छी खबर है। 25 अगस्त की सुबह तक राज्य में 839.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों के इस अवधि के औसत (810.2 मिमी) से लगभग 29.2 मिमी अधिक है। गत वर्ष इसी अवधि में 821.0 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी। प्रचुर बारिश और समय पर खाद-बीज मिलने से किसानों के चेहरों पर चमक लौट आई है और इस वर्ष एक बार फिर बंपर पैदावार की उम्मीद प्रबल हो गई है।
