छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पर आपत्तिजनक पोस्ट मामला: हाईकोर्ट में हुआ समझौता, याचिकाकर्ताओं को लगानी पड़ी बिना शर्त माफी
- राज्यपाल की गरिमा को ठेस पहुँचाने और सोशल मीडिया पर कार्टून साझा करने से जुड़ा था मामला।
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर दी राहत।
- फेसबुक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अखबारों में माफीनामा प्रकाशित करने सहित कड़ाई से अनुपालन के दिए गए निर्देश।
रायपुर 26 अगस्त :
- आपत्तिजनक पोस्ट और FIR: याचिकाकर्ताओं (प्रणव कलिता एवं लक्ष्यधर राजबोंगसी) द्वारा छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल से संबंधित एक कार्टून को सोशल मीडिया पर साझा किया गया था। साथ ही, असमिया भाषा में आपत्तिजनक और अपमानजनक कैप्शन लिखकर उनकी सार्वजनिक छवि धूमिल करने और संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया गया था। इसके चलते रायपुर के थाना सिविल लाइन में एफआईआर क्रमांक 232/2026 दर्ज कराई गई थी, जिसका आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर के न्यायालय में दाखिल हो चुका था।
- हाईकोर्ट में समझौता और शर्तें: इस एफआईआर को निरस्त कराने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान 19.08.2026 को याचिकाकर्ताओं द्वारा शपथ पत्र पेश कर माफी मांगे जाने पर, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता (सर्वोच्च न्यायालय के श्री मनोज गोयल) की सहमति से कुछ कड़ी शर्तों पर समझौता हुआ।
- हाईcourt का अंतिम आदेश: माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की शक्तियों का उपयोग करते हुए, संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से समझौते के आधार पर मामले का निराकरण कर दिया है।
समझौते की मुख्य शर्तें:
- न्यायालय के समक्ष बिना शर्त लिखित माफी मांगना।
- मूल पोस्ट के समान प्रमुखता के साथ उसी फेसबुक अकाउंट पर माफी का प्रकाशन करना।
- गुवाहाटी स्थित निर्दिष्ट दैनिक समाचार पत्रों में माफी का प्रकाशन करना।
- याचिकाकर्ताओं के नियंत्रण वाले सभी डिजिटल/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री को स्थायी रूप से हटाना।
- भविष्य में इस तरह के आचरण को न दोहराने का वचन देना और असम में दायर प्रतिशोधत्मक एफआईआर को वापस लेने/बंद करने हेतु उचित कदम उठाना।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं को उपरोक्त सभी शर्तों का तुरंत अनुपालन करना होगा।
