छत्तीसगढ़ में खेलों का स्वर्णिम दौर: मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान, हॉकी लीग के आयोजन की बड़ी तैयारी
- खेल अधोसंरचना को मजबूती और बेहतर खेल वातावरण तैयार करने के लिए सरकार का ऐतिहासिक कदम।
- बजट में चार गुना से अधिक की वृद्धि, चालू वित्त वर्ष में खेल विभाग का बजट पहुंचा 304 करोड़ रुपए।
- बस्तर के बाद अब सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ, दूरस्थ आदिवासी अंचलों की खेल प्रतिभाओं को मिल रहा नया मंच।

रायपुर 4 अगस्त : छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास, बुनियादी ढांचे की मजबूती और युवा प्रतिभाओं को तराशने के लिए विष्णु देव साय सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रही है। राज्य के उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में एक उच्चस्तरीय प्रेस-कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं का विस्तृत खाका खींचा।
प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन और खेल बजट में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बताया कि राज्य में खेलों के लिए एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ के तहत 100 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही, ‘छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना’ के लिए 57 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का शुरुआती बजट मात्र 4 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर चालू वित्तीय वर्ष में 304 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह राज्य सरकार की खेल के प्रति राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
हॉकी लीग का आयोजन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण पर जोर
राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए श्री साव ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही हॉकी लीग के आयोजन की बड़ी तैयारी चल रही है। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय और पेशेवर प्रशिक्षण मुहैया कराने के लिए राज्य की खेल अकादमियों के 14 प्रशिक्षकों (कोच) को विशेष प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है।
नए प्रशासनिक पदों का सृजन और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
खेल गतिविधियों के सुचारू और प्रभावी संचालन के लिए राज्य शासन ने प्रशासनिक कसावट लाते हुए छह नए जिलों— गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के नए पदों का सृजन किया है।
इसके अतिरिक्त, विभागीय योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन को गति देने के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में तेजी से गतिमान और प्रक्रियाधीन है।
दूरस्थ आदिवासी अंचलों से निकल रही हैं खेल प्रतिभाएं
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक बच्चे और युवा खेल के मैदानों तक पहुंचें। दूरस्थ आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक अभिनव पहल की गई है।
पिछले दो वर्षों से लगातार सफलतापूर्वक आयोजित हो रहे ‘बस्तर ओलंपिक’ की तर्ज पर अब इस साल से ‘सरगुजा ओलंपिक’ की भी शानदार शुरुआत कर दी गई है। इसके अलावा, देश के पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की ऐतिहासिक मेजबानी कर छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान स्थापित कर ली है।
