लोक भवन में उमड़ी आत्मीयता: दिव्यांग बच्चों ने राज्यपाल श्री रमेन डेका को बांधी राखी, रक्षाबंधन पर दिखा अनूठा स्नेह

रायपुर, 27 अगस्त 2026: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राजधानी के लोक भवन में आज आत्मीयता, स्नेह और अपनत्व का एक बेहद खूबसूरत और भावनात्मक नजारा देखने को मिला। ‘कोपल वाणी’ के श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों और ‘मिनी मार्वेल्स स्कूल’ के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने लोक भवन पहुंचकर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका को अपने हाथों से बनाई गई सुंदर राखियां बांधीं।
मासूम हाथों से बुने गए इस रक्षा सूत्र ने लोक भवन के माहौल को पूरी तरह से भावुक और ऊर्जावान बना दिया।
खास बातें और कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण
- आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल: बच्चों ने न केवल राज्यपाल को राखियां बांधीं, बल्कि अपने हाथों से तैयार इन राखियों की खासियतों के बारे में भी बड़े उत्साह के साथ बताया।
- मिष्ठान्न और उपहारों की बौछार: रक्षा सूत्र बांधने के बाद बच्चों ने राज्यपाल का मुंह मीठा कराया। वहीं, राज्यपाल श्री डेका ने भी बच्चों के इस स्नेह को खुले दिल से स्वीकार करते हुए उन्हें दुलारा, आशीर्वाद दिया और आकर्षक उपहार भेंट किए।
- आत्मविश्वास से खिले चेहरे: विशेष रूप से कोपल वाणी के दिव्यांग बच्चों के चेहरों पर झलकता आत्मविश्वास यह बता रहा था कि उनकी रचनात्मकता और कौशल समाज में एक मजबूत सकारात्मक संदेश दे रहे हैं।
राज्यपाल ने की बच्चों की प्रतिभा की सराहना
इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बच्चों की कला और उत्साह की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि:
“रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है। इन मासूम बच्चों का यह आत्मीय स्नेह सीधे मन को छू लेने वाला है। समाज का यह कर्तव्य है कि हम दिव्यांग बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर प्रदान करें।”
राज्यपाल ने सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया।
गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति
इस हृदयस्पर्शी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए कई विशिष्ट लोग उपस्थित रहे:
- श्रीमती पदमा शर्मा (संस्थापिका, कोपल वाणी)
- श्रीमती श्रद्धा साहू एवं सोमियां दामनी (कोपल वाणी परिवार)
- श्रीमती अनुभूति श्रीवास्तव (डायरेक्टर, मिनी मार्वेल्स स्कूल) एवं अन्य शिक्षकगण।
यह आयोजन इस बात का सशक्त संदेश दे गया कि दिव्यांग बच्चे हमारी समाज रूपी मुख्यधारा का अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें थोड़ा सा प्रोत्साहन देकर आसमान छूने के अवसर दिए जा सकते हैं।
