छत्तीसगढ़ में मानसून की मेहरबानी: औसत से अधिक बरसे बदरा, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलरामपुर में सबसे ज्यादा बारिश

रायपुर, 29 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून का मिजाज बेहद मेहरबान नजर आ रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस सीजन (1 जून से 28 अगस्त 2026 तक) औसतन 855.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों के औसत (849.3 मिमी) की तुलना में 100.8 प्रतिशत है, जो कृषि और जल संरक्षण के लिहाज से एक शानदार संकेत है। अकेला 28 अगस्त का दिन भी पूरे प्रदेश में औसतन 6.4 मिमी बारिश लेकर आया।
संभागवार वर्षा की स्थिति एक नजर में:
| संभाग | मुख्य विशेषता / सर्वाधिक वर्षा वाला जिला | औसत की तुलना में स्थिति |
|---|---|---|
| सरगुजा संभाग | बलरामपुर (1164.4 मिमी – 157.7%) | अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश, सरगुजा जिला थोड़ा पीछे (77.1%) |
| मध्य छत्तीसगढ़ (रायपुर-बिलासपुर) | सारंगढ़-बिलाईगढ़ (1088.5 मिमी – 166.0%) | प्रदेश में सबसे मजबूत आंकड़े, रायपुर व महासमुंद में 130% से अधिक बारिश |
| दुर्ग संभाग | बालोद (844.6 मिमी – 108.2%) | मैदानी इलाकों में मिला-जुला असर; कबीरधाम, बेमेतरा और मोहला-मानपुर में धीमी गति |
| बस्तर संभाग | नारायणपुर (1260.9 मिमी – 121.3%) | बस्तर संभाग में सबसे आगे; कांकेर में सबसे कम (65.6%) बारिश दर्ज |
जिलों का विस्तृत विवरण:
- शीर्ष प्रदर्शन वाले जिले: प्रतिशत के लिहाज से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला 166.0% (1088.5 मिमी) बारिश के साथ पूरे प्रदेश में सबसे आगे है। इसके बाद बलरामपुर में 157.7% (1164.4 मिमी), रायपुर में 130.7% (920.0 मिमी) और महासमुंद में 130.7% (1017.9 मिमी) पानी बरसा है। नारायणपुर (121.3%) और गरियाबंद (120.4%) में भी झमाझम फुहारें पड़ी हैं।
- सामान्य व मध्यम क्षेत्र: दुर्ग (100.4%), राजनांदगांव (99.3%), रायगढ़ (99.8%) और धमतरी (101.5%) जिले सामान्य वर्षा के बेहतरीन संतुलन में हैं।
- कम वर्षा वाले क्षेत्र: बेमेतरा (78.2%), सुकमा (72.3%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (70.6%) और कांकेर (65.6%) जिलों में मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, हालांकि हालिया दौर की बारिश से यहाँ भी सुधार की उम्मीद है।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में सक्रिय तंत्र के चलते इन कम वर्षा वाले इलाकों में भी कोटे की भरपाई हो सकती है, जिससे किसानों के चेहरों पर व्यापक मुस्कान बनी हुई है।
