रायपुर 30 अगस्त | विशेष ब्यूरो
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में बिजली के निजीकरण को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल झूठ, दुष्प्रचार और गलतफहमी के सहारे जनता को गुमराह करने की ओछी राजनीति कर रही है।
हाल ही में बिजली से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसुनवाई को लेकर मचे सियासी घमासान पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका निजीकरण से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
मुख्यमंत्री के बयान के प्रमुख बिंदु:
- निजीकरण की अटकलों पर पूर्ण विराम: सीएम साय ने साफ किया कि सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे निजीकरण के दावे पूरी तरह मनगढ़ंत, निराधार और तथ्यहीन हैं।
- प्रशासनिक औपचारिकता को राजनीतिक रंग: बिजली क्षेत्र में होने वाली सामान्य जनसुनवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
- कांग्रेस की हताशा पर तंज: मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस जनता के बीच डर और भ्रम का माहौल पैदा करने की नाकाम कोशिश कर रही है।
- जनता और कर्मचारियों के हित सर्वोपरि: राज्य सरकार ने आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी, उनके अधिकारों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।
“कांग्रेस हमेशा दुष्प्रचार और गलतफहमी में लोगों को डालने का काम करती है। इस तरह की सुनवाई एक रूटीन का काम है, इसका मतलब यह नहीं है कि बिजली का हम लोग निजीकरण कर रहे हैं।” — श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
राजनीतिक मायने:
विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इस आक्रामक और स्पष्ट रुख के बाद कांग्रेस का यह चुनावी या राजनीतिक शिगूफा कमजोर पड़ गया है। सरकार ने शुरुआती चरण में ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर विपक्ष के एजेंडे को बेअसर कर दिया है।
