संत रविदास की 650वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ में भव्य कलश वंदन महाअभियान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की कई ऐतिहासिक घोषणाएं

रायपुर 4 अगस्त : संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।
यह विचार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष್ಯ में आयोजित ‘कलश वंदन महाअभियान’ के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

पवित्र कलश का वंदन और जन-अभियान की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री श्री साय ने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण किया और संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित कर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
मुख्यमंत्री ने इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे और गांव-गांव तक संदेश पहुंचाने वाले प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग, गांव और परिवार को जोड़ने वाला राष्ट्रीय समरसता अभियान बनेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा संत रविदास के सम्मान में की गई प्रमुख घोषणाएं
संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष को ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं कीं:
- सार्वजनिक अवकाश और प्रतिबंध: आगामी वर्ष 2027 में संत रविदास की जयंती (माघी पूर्णिमा) के अवसर पर प्रदेशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन पूरे छत्तीसगढ़ में मांस एवं मदिरा का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
- राज्य अलंकरण पुरस्कार: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदान किए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में अब ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास’ के नाम से एक विशेष राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।
- प्रमुख चौक का नामकरण: राजधानी रायपुर के समीप नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।
- विधानसभा में संदेश का अंकन: छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश—“ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।”—का अंकन कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर सार्थक प्रयास किए जाएंगे।
संतों और महापुरुषों ने समाज को दिखाई नई दिशा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों ने समाज को नई चेतना दी।
उन्होंने सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का विरोध करने वाले संत रविदास के साहस को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध प्रसंग “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का जिक्र किया और कहा कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।

‘विकास भी, विरासत भी’ है हमारा मार्गदर्शक मंत्र
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के साथ-साथ “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र पर आगे बढ़ रही है। संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल का यह कलश देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का प्रतीक है।
विशिष्ट अतिथियों के विचार
- श्री गुरु खुशवंत साहेब (कैबिनेट मंत्री): संत रविदास ने छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। प्रदेश सरकार उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- श्री अजय जामवाल: संत रविदास का समरसता का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। समाज को विभाजित करने वाली ताकतों से सावधान रहकर संतों की शिक्षाओं को जीवन में उतारना आवश्यक है।
- सुश्री सरोज पाण्डेय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सर्वोच्च सम्मान दे रहा है। संत रविदास ने सनातन परंपरा, श्रम और सामाजिक समरसता का जो मार्ग दिखाया, वह अनुकरणीय है।
भव्य उपस्थिति
इस गरिमाममय कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री मोतीलाल साहू, श्री इंद्र कुमार साहू, श्री संपत अग्रवाल, श्री रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत श्री युधिष्ठिर लाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज के प्रबुद्धजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
