डिजिटल छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक फैसला: अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, पूरी प्रक्रिया हुई हाई-टेक

एक नज़र में नई व्यवस्था (Key Highlights)
- पूर्णतः डिजिटल प्रक्रिया: आवेदन से लेकर फाइनल रिपोर्ट तक, सब कुछ ऑनलाइन।
- तहसील जाने की बाध्यता खत्म: अब चॉइस सेंटर (CSC), विभागीय पोर्टल या ‘सेवासेतु’ से सीधे होगा आवेदन।
- पारदर्शिता और लाइव ट्रैकिंग: राजस्व निरीक्षक (RI) की रिपोर्ट भी ऑनलाइन होगी, जिससे आवेदक हर स्टेप की लाइव मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
- समय-सीमा तय: एनआईसी (NIC) के ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर में नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश।
- बिचौलियों की छुट्टी: मैनुअल सिस्टम खत्म होने से भ्रष्टाचार और दलालों का दखल पूरी तरह समाप्त।
रायपुर 7 सितम्बर : छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों के लिए राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने एक बेहद क्रांतिकारी और जनहितैषी कदम उठाया है। अब तक ज़मीन के सीमांकन (Demarcation) जैसी बुनियादी और ज़रूरी कानूनी प्रक्रिया के लिए किसानों और ज़मीन मालिकों को तहसील कार्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे, लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और कागजी पचड़ों से जूझना पड़ता था। लेकिन अब राज्य सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। ज़मीन के सीमांकन की संपूर्ण प्रक्रिया को अब पूरी तरह पारदर्शी, हाई-टेक और डिजिटल बना दिया गया है।
अब सीधे तहसीलदार की डिजिटल डेस्क पर पहुंचेगा आवेदन
नई व्यवस्था के तहत सीमांकन के लिए अब किसी भी नागरिक को तहसील ऑफिस जाने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं होगी। आवेदक राज्यभर में फैले लोक सेवा केंद्रों (CSC/चॉइस सेंटर), राजस्व विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन सिटिज़न पोर्टल या ‘सेवासेतु’ मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना आवेदन आसानी से दर्ज करा सकेंगे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ऑफलाइन या मैनुअल आवेदन लेने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। अब तक की व्यवस्था में कागजी आवेदन तहसील स्तर पर दर्ज होते थे, जिसमें कई बार फाइलें अटक जाती थीं। लेकिन अब आवेदक द्वारा ऑनलाइन फॉर्म सबमिट होते ही वह सीधे संबंधित तहसीलदार की ऑफिशियल डिजिटल आईडी में ट्रांसफर हो जाएगा। इसके साथ ही, मैदानी अमले यानी राजस्व निरीक्षक (RI) द्वारा भी अपनी जांच रिपोर्ट और नक्शा ऑनलाइन ही अपलोड करने का प्रावधान किया गया है, जिससे फाइल की हर गतिविधि पारदर्शी रहेगी।
सिर्फ विवाद या आपत्ति होने पर ही होगी तहसील जाने की ज़रूरत
इस पूरी योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि ज़मीन का सीमांकन मामला पूरी तरह निर्विवाद (Non-disputed) है, तो आवेदक को अपने जीवन में एक बार भी सरकारी दफ्तर का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। नाप-जोख, डिजिटल मैपिंग और रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन संपन्न होगी।
- अपवाद: आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना होगा जब सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान पड़ोसी भूमिस्वामी या किसी अन्य पक्ष द्वारा कोई लिखित या औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए।
- अगर कोई विवाद नहीं है, तो तय समयावधि के भीतर घर बैठे सीमांकन रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाएगी।
भ्रष्टाचार, दलालों और पेंडेंसी पर कड़ा प्रहार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से सरकारी कार्यालयों में पनपने वाले भ्रष्टाचार और बिचौलियों (दलालों) का साम्राज्य स्वतः नेस्तनाबूद हो जाएगा। फाइलों के महीनों तक पेंडिंग रहने की आम शिकायत से लोगों को मुक्ति मिलेगी। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट (E-Court) सॉफ्टवेयर में आवश्यक तकनीकी बदलाव कर इस विशेष मॉड्यूल को महज़ 7 दिनों के भीतर सक्रिय करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।
डिजिटल छत्तीसगढ़: ई-गवर्नेंस की दिशा में बढ़ते मील के पत्थर
राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में नागरिकों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए कई बेहतरीन डिजिटल सौगातें दी हैं, जो अब सुशासन का पर्याय बन चुकी हैं:
- डिजिटल भूमि रिकॉर्ड (B-1 एवं P-II): अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से QR कोड युक्त प्रमाणित खसरा, खतौनी और नक्शा डाउनलोड कर सकता है, जो कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य है।
- ऑनलाइन नामांतरण (Mutation): ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए अब दफ्तरों के चक्कर नहीं, बल्कि घर बैठे ऑनलाइन आवेदन और उसकी लाइव स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
- डिजिटल टैक्स और डायवर्शन: ऑनलाइन नजरी नक्शा, भूमि डायवर्शन (परिवर्तित भूमि) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटाइज़ कर दिया गया है।
- ऑनलाइन राजस्व अदालतें: राजस्व न्यायालयों में चल रहे मुकदमों की पेशी की तारीख, आदेश और सुनवाई का लाइव स्टेटस अब ऑनलाइन एक क्लिक पर देखा जा सकता है।
राजस्व विभाग की यह नई पहल छत्तीसगढ़ को आधुनिक, डिजिटल और पेपरलेस गवर्नेंस की श्रेणी में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा करती है। इस कदम से न सिर्फ आम जनता के बेशकीमती समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मज़बूत होगा।
