रायपुर 8 सितम्बर :
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड स्थित ग्राम पंचायत पतरापारा के रहने वाले भूमिहीन कृषि मजदूर शंभू बारी का जीवन आज उन तमाम जरूरतमंद परिवारों के लिए एक जीवंत मिसाल बन चुका है, जो कभी दो वक्त की रोटी और सिर पर एक सुरक्षित छत के लिए संघर्ष किया करते थे। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने उनके बिखरे हुए सपनों को न केवल समेटा है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी दी है।
संकट के हर दौर में बनी संजीवनी: ‘दीनदयाल उपाध्याय योजना’
भूमिहीन कृषि मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए जीवन हर पल एक अनिश्चितता भरा इम्तिहान होता है। दिहाड़ी मजदूरी के भरोसे जीने वाले शंभू बारी के लिए जब कभी काम नहीं होता था, तो घर चलाना पहाड़ जैसा लगता था। ऐसे में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना उनके लिए किसी मसीहा से कम साबित नहीं हुई।
इस योजना के तहत मिलने वाली 10,000 रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता ने उनके जीवन में वित्तीय सुरक्षा का बड़ा संबल दिया है। शंभू बारी बताते हैं कि यह राशि उनके लिए सिर्फ कागजी मदद नहीं, बल्कि मुसीबत के वक्त का पक्का सहारा है। घर के जरूरी सामान, अचानक आ पड़ी बीमारी का खर्च या बच्चों की जरूरतें—यह राशि हर संकट में उनके परिवार की ढाल बनती है।
वर्षों का खुला आसमान अब बना सुरक्षित आशियाना: ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’
पक्का मकान हर गरीब का सबसे बड़ा और कठिन सपना होता है। सालों-साल कच्चे और जीर्ण-शीर्ण मकान में कड़कड़ाती ठंड, चिलचिलाती धूप और बारिश की मार झेलना शंभू बारी के परिवार की मजबूरी थी। लेकिन शासन की संवेदनशील पहल से पहले उन्हें भूमि का अधिकार मिला और फिर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्के मकान की चाबी मिल गई।
आज जब वे अपने खुद के पक्के घर की चौखट पर कदम रखते हैं, तो आंखों में संतोष और भविष्य की सुरक्षा का सुकून साफ झलकता है। यह सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान का प्रतीक है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल: ‘महतारी वंदन योजना’
परिवार की आर्थिक गाड़ी को दोनों पहियों से मजबूती देने का काम महतारी वंदन योजना ने बखूबी किया है। इस योजना के माध्यम से शंभू बारी की पत्नी के बैंक खाते में प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर हो रही है।
नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि घर की रसोई और छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में बड़ा संबल दे रही है। इसके साथ ही, ग्रामीण अंचल की महिलाओं में वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनने का जो आत्मविश्वास जगा है, वह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।
“शासन की योजनाओं ने हमें जीने का नया हक दिया”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार की पारदर्शी और जनहितैषी नीतियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शंभू बारी भावुक हो जाते हैं। वे बड़े गर्व के साथ कहते हैं:
“दीनदयाल उपाध्याय योजना के साल के 10 हजार रुपये, प्रधानमंत्री आवास से मिला पक्का घर और महतारी वंदन योजना से मेरी पत्नी को हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये—इन तीनों ने हमारे जीवन की कायापलट कर दी है। अब हमें किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। शासन ने हमें सिर्फ मदद नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन दिया है।”
निष्कर्ष: समावेशी और संवेदनशील शासन की तस्वीर
शंभू बारी के परिवार की यह सफलता इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि जब सरकारी नीतियां बिना किसी बाधा के सीधे अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो सदियों के अभाव और बेबसी के बादल छंट जाते हैं। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार की उस प्रतिबद्धता का आईना है, जो हर गरीब के चेहरे पर स्थायी मुस्कान लाने के लिए संकल्पबद्ध है।
