सोशल मीडिया की चीख पर धड़का सूबे के मुखिया का दिल; 10 साल से बिस्तर पर कैद शशिकांत के लिए ‘मसीहा’ बने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
धमतरी के देवपुर का वो 29 वर्षीय युवक, जिसके लिए बंद हो चुके थे जिंदगी के सारे रास्ते; मुख्यमंत्री की एक पहल से AIIMS रायपुर में शुरू हुआ संजीवनी इलाज
संवेदनशीलता की पराकाष्ठा: मुख्यमंत्री ने खुद डायल किया नंबर, शशिकांत से बोले- “बेटे, हौसला रखो, तुम्हारे इलाज और परिवार की चिंता अब मेरी है”; ₹4 लाख की त्वरित सहायता स्वीकृत

रायपुर/धमतरी, 10 सितंबर 2026
कहते हैं कि जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब व्यवस्था का मानवीय चेहरा ईश्वर का रूप ले लेता है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नजारा छत्तीसगढ़ में देखने को मिला है, जहां मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता ने धमतरी जिले के ग्राम देवपुर निवासी 29 वर्षीय शशिकांत भरत को साक्षात मौत के मुंह से खींचकर जिंदगी की नई रौशनी की ओर अग्रसर कर दिया है। पिछले एक दशक से बिस्तर पर बेबस और लाचार पड़े इस युवक की कहानी जब सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने बिना एक पल की देरी किए देश के सबसे संवेदनशील राजनेता की तरह स्वतः संज्ञान लिया।
मुख्यमंत्री के सख्त और त्वरित निर्देशों के बाद पूरी प्रशासनिक मशीनरी आधी रात को ही सक्रिय हो गई। 9 सितंबर की ढलती शाम को जब एक तरफ पूरा प्रदेश अपने घरों को लौट रहा था, तब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम शशिकांत को सरकारी एम्बुलेंस से लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर के लिए रवाना हो रही थी। मुख्यमंत्री ने न केवल एम्स में उनके लिए अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित कराई, बल्कि शशिकांत के इलाज और परिवार के भरण-पोषण के लिए तत्काल 4 लाख रुपये की भारी-भरकम आर्थिक सहायता राशि को भी हरी झंडी दे दी।
फ्लैशबैक 2016: एक सड़क हादसे ने उजाड़ दी थीं हंसती-खेलती जिंदगी की खुशियां
शशिकांत की यह दास्तां किसी भी संवेदनशील दिल को रुला देने के लिए काफी है। वर्ष 2016 में, जब शशिकांत मात्र 19 वर्ष के थे और आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने तैर रहे थे, तब एक काल बनकर आए सड़क हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। सिर और रीढ़ की हड्डी में आई गंभीर चोटों के कारण वे करीब 50 दिनों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे।
मौत को मात देकर जब वे कोमा से बाहर आए, तो डॉक्टरों ने बताया कि उनके सर्वाइकल (Cervical Spine) में इतनी गहरी चोट लगी है कि उनके दोनों हाथ और दोनों पैरों की कार्यक्षमता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। बीते 10 सालों में बूढ़े माता-पिता ने अपने कलेजे के टुकड़े को फिर से पैरों पर खड़ा देखने के लिए अपनी जमीन-जायदाद, खेत और जीवन भर की जमापूंजी तक बेच दी। प्रदेश के दर्जनों छोटे-बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे, पर हर जगह से केवल निराशा ही हाथ लगी। थक-हारकर परिवार अपनी इस बदकिस्मती पर सिर्फ आंसू बहाने को मजबूर था।
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│ ★ उस 'जादुई फोन कॉल' की इनसाइड स्टोरी ★ │
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│ जब शशिकांत के मोबाइल की घंटी बजी और दूसरी तरफ से आवाज │
│ आई- "मैं छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोल रहा │
│ हूँ, कैसे हो शशिकांत?"... तो पूरे घर में सन्नाटा खिंच │
│ गया। मुख्यमंत्री ने अत्यंत आत्मीयता से शशिकांत का हाल │
│ जाना और उनसे कहा कि वे खुद को अकेला न समझें। सूबे का │
│ मुखिया और पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है। इस एक कॉल ने │
│ शशिकांत के भीतर जीने की वो ललक दोबारा जगा दी, जो │
│ पिछले 10 सालों में कहीं खो चुकी थी। │
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“हम तो हार चुके थे, साय साहब हमारे लिए भगवान बनकर आए” : सिसक पड़े परिजन
एम्स रायपुर के सर्वसुविधायुक्त विशेष वार्ड में जब डॉक्टरों की टीम शशिकांत की जांच कर रही थी, तब उनकी बूढ़ी मां की आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए शशिकांत ने रूंधे गले से कहा, “10 साल से मैं इस चारपाई पर एक जिंदा लाश की तरह पड़ा था। मुझे लगता था कि मैं अपने परिवार पर बोझ हूँ। लेकिन जब देश के इतने बड़े नेता और हमारे मुख्यमंत्री जी ने खुद मुझे फोन किया, तो मुझे अपनी कानों पर यकीन नहीं हुआ। उन्होंने जिस अपनेपन से मेरा हौसला बढ़ाया और एम्स में भर्ती कराकर ₹4 लाख दिए हैं, उन्होंने मुझे और मेरे परिवार को एक नया जीवनदान दे दिया है। अब मुझे विश्वास है कि मैं दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सकूँगा।”
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│ ★ AIIMS में महा-मेडिकल बोर्ड गठित ★ │
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│ मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद, AIIMS रायपुर के │
│ निदेशक ने देश के सर्वश्रेष्ठ न्यूरो-सर्जन, ऑर्थोपेडिक │
│ और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों का एक विशेष 'महा-मेडिकल │
│ बोर्ड' (Medical Board) गठित कर दिया है। डॉक्टरों के │
│ मुताबिक, हालांकि केस पुराना और पेचीदा है, लेकिन अत्याधुनिक│
│ रीहैबिलिटेशन और न्यूरो-मॉड्यूलेशन तकनीकों के जरिए │
│ शशिकांत की स्थिति में सुधार लाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। │
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संपादकीय दृष्टिकोण: यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि ‘सुशासन’ का जीवंत उदाहरण है
धमतरी के एक सुदूर गांव के गरीब युवक के लिए राजधानी के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान के दरवाजे खुल जाना और खुद मुख्यमंत्री का इस पर नजर रखना, यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ सिर्फ कागजों पर लिखी इबारत नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह त्वरित और संवेदनशील पहल राजनीति से ऊपर उठकर मानवता की एक ऐसी मिसाल है, जो आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बनेगी। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि साय सरकार में समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की हर छोटी-बड़ी तकलीफ सीधे सरकार के दिल तक पहुंचती है।
