छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी सौगात: तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ की लागत से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

रायपुर, 05 अगस्त 2026 — छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों के स्वाभिमान, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील कदम उठाया है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद के माध्यम से रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड के 50 शासकीय विद्यालयों में आधुनिक बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वाकांक्षी पहल से क्षेत्र में बालिका शिक्षा को एक नया संबल मिलेगा और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।
💡 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- कुल स्वीकृत राशि: 3.50 करोड़ रुपये (DMF मद से)।
- लाभान्वित क्षेत्र: तिल्दा विकासखंड के 50 ग्रामीण शासकीय विद्यालय।
- प्रति यूनिट लागत: 7 लाख रुपये प्रति आधुनिक बालिका शौचालय।
- मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण बेटियों को सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण शैक्षणिक माहौल प्रदान करना ताकि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
🏫 चयनित 50 ग्राम पंचायतों और गांवों की सूची
प्रशासनिक स्वीकृति के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के निम्नलिखित 50 गांवों के शासकीय विद्यालयों में 01-01 आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा:
- प्रमुख गांव: छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी, मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा, भरुवाडीह कला, खैरखूट (बलोदीखुर्द), जलसो, सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी (अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना, खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन (सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू।
🌟 ग्रामीण अंचल में दौड़ी उत्साह की लहर
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की शिक्षा में बड़ा रोड़ा बनता था। राज्य सरकार द्वारा एक साथ 50 गांवों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दिए जाने से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है।
अभिभावकों का कहना है कि इन आधुनिक शौचालयों के बन जाने से बेटियों को स्कूल में पढ़ाई के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनकी उपस्थिति और ड्रॉफ्टआउट रेट (स्कूल छोड़ने की दर) में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। शासन की यह दूरदर्शी पहल ग्रामीण बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित हो रही है।
