रेलवे का बड़ा संवेदनशील फैसला: तीजा पर्व पर बहनों को तोहफा, आज बहाल रहेगी रद्द की गई रायपुर-कोरबा पैसेंजर
उरकुरा में मेगा ब्लॉक और यार्ड रीमॉडलिंग के बावजूद यात्रियों की चौखट पर झुका प्रशासन; निर्धारित समय पर पटरियों पर दौड़ेगी गाड़ी संख्या 58204
सड़क मार्ग की लूट और त्योहार की भीड़ के बीच बड़ी राहत, ‘लाइफलाइन’ बहाल होने से हजारों यात्रियों ने ली राहत की सांस

बिलासपुर/रायपुर, 14 सितम्बर 2026
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और आस्था के लोकपर्व ‘तीजा’ के मौके पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने जनता की तकलीफों को समझते हुए एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। विकास कार्यों के नाम पर आज यानी 14 सितम्बर 2026 को रद्द की जा चुकी गाड़ी संख्या 58204 रायपुर-कोरबा पैसेंजर का परिचालन रेलवे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बहाल (रिस्टोर) कर दिया है। ऐन त्योहार के दिन ट्रेन रद्द होने से हजारों बहनों के मायके जाने के अरमानों पर पानी फिरने लगा था, लेकिन रेलवे के इस यू-टर्न ने त्योहारी खुशियों को दोगुना कर दिया है। अब यह गाड़ी अपने पुराने और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार ही पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी।
विकास कार्य पर भारी पड़ी जनभावना: क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, रायपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। रेलवे की इंफ्रास्ट्रक्चर विंग द्वारा उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग (Pre-NI) और नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) का भारी-भरकम काम किया जा रहा है।
तकनीकी रूप से यह बेहद जटिल काम है, जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से इस रूट की कई गाड़ियों को रद्द या री-शेड्यूल किया गया था, जिसमें रायपुर-कोरबा पैसेंजर भी शामिल थी। लेकिन जैसे ही तीजा त्योहार के चलते यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों में हाहाकार मचा, रेलवे प्रबंधन ने अपनी कार्ययोजना में बदलाव किया। तकनीकी चुनौतियों के बीच से रास्ता निकालते हुए त्योहार के दिन इस महत्वपूर्ण ट्रेन को चलाने की हरी झंडी दे दी गई।
महंगे किराए की मार और बसों की मनमानी से मिली मुक्ति
त्योहार के सीजन में जब ट्रेनें रद्द होती हैं, तो इसका सीधा फायदा निजी बस संचालक और टैक्सी ऑपरेटर उठाते हैं। पैसेंजर ट्रेन रद्द होने की खबर के बाद सड़कों पर भारी भीड़ और मनमाने किराए की शिकायतें आने लगी थीं। रायपुर से बिलासपुर, चांपा और कोरबा जाने वाले दैनिक यात्रियों और तीज मनाने ससुराल से मायके निकल रही महिलाओं के लिए बस का सफर न सिर्फ महंगा बल्कि बेहद थकाऊ साबित हो रहा था। इस पैसेंजर ट्रेन के दोबारा बहाल होने से आम जनता को जेब कटने से बड़ी राहत मिली है।
: क्यों खास है यह पैसेंजर ट्रेन?
- हजारों यात्रियों की लाइफलाइन: रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और कोरबा जिले को आपस में जोड़ने वाली यह सबसे प्रमुख और किफायती लोकल ट्रेन है।
- छोटे स्टेशनों के लिए एकमात्र सहारा: एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव जहां छोटे स्टेशनों पर नहीं होता, वहीं यह पैसेंजर हर छोटे-बड़े गांव और कस्बे के यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाती है।
- समय की बचत: त्योहार की भीड़ में सड़क जाम से जूझने के बजाय लोग इस ट्रेन से समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
रेलवे के फैसले पर जनता का रिएक्शन: “यह सिर्फ ट्रेन नहीं, खुशियों की बहाली है”
ट्रेन बहाल होने की खबर फैलते ही रेलवे स्टेशनों और सोशल मीडिया पर यात्रियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कोरबा की रहने वाली शकुंतला साहू ने बताया, “तीजा के दिन रायपुर से कोरबा जाने के लिए बसों में पैर रखने की जगह नहीं थी, ऊपर से किराया डबल था। ट्रेन चालू होने से हम बहनों को बहुत बड़ी सहूलियत हो गई है।” वहीं बिलासपुर से रोजाना अप-डाउन करने वाले नौकरीपेशा वर्ग ने भी रेलवे के इस त्वरित फैसले की सराहना की है।
“रेलवे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। उरकुरा यार्ड में चल रहे बेहद जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य के बावजूद, तीजा त्योहार के मद्देनजर यात्रियों की सुगमता को ध्यान में रखकर रायपुर-कोरबा पैसेंजर को आज चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी भी रेल यात्री को परेशानी न हो।”
— मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO), दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे
