माटी के लालों को हुनर का आसमान, अनुभवी हाथों को नया सम्मान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मास्टरस्ट्रोक, लिख रहा ‘नए छत्तीसगढ़’ की तकदीर

> “धान के कटोरे में अब केवल फसलें ही नहीं लहलहाएंगी, बल्कि विश्वस्तरीय कौशल और उद्यमशीलता की नई फसल भी तैयार होगी। उम्र की बंदिशों को तोड़कर अनुभव को अवसर देने का यह फैसला राज्य के मानव संसाधन का कायाकल्प कर देगा।”
रायपुर, 16 सितम्बर 2026 (विशेष संवाददाता): एक समय था जब छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी खदानों, घने जंगलों और ‘धान के कटोरे’ तक सीमित मानी जाती थी। लेकिन, विकास के पहिये जब दूरदर्शी नेतृत्व के सारथी के हाथों में होते हैं, तो परिदृश्य बदलते देर नहीं लगती। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने दो ऐसे ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले लिए हैं, जो न केवल राज्य की सियासत में बल्कि सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने जा रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि ‘नए छत्तीसगढ़’ की नींव केवल ईंट और गारे से नहीं, बल्कि ‘युवाओं के हुनर’ और ‘वरिष्ठों के अनुभव’ से रखी जाएगी।
क्रांति का पहला अध्याय: नवा रायपुर में ‘कौशल का महाकुंभ’ (NSTI)
आज की दुनिया में डिग्रियां केवल कागज़ के टुकड़े रह जाती हैं, यदि उनके साथ बाज़ार की मांग के अनुरूप ‘स्किल्स’ (हुनर) न हों। इसी मर्म को समझते हुए साय सरकार ने नवा रायपुर (अटल नगर) के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना का शंखनाद किया है। भारत सरकार के सहयोग से शुरू हो रहा यह प्रोजेक्ट प्रदेश के युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
परियोजना की विशालता और प्रभाव:
- 200 करोड़ का निवेश, 10 एकड़ का विशाल परिसर: यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, रोबोटिक्स, एआई और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग का एक विश्वस्तरीय केंद्र होगा।
- हजारों युवाओं की संवरेगी ज़िंदगी: यहां हर साल 1,000 युवाओं को दीर्घकालीन (Long-term) और 3,000 युवाओं को अल्पकालीन (Short-term) ट्रेनिंग दी जाएगी।
- नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को ज़मीन पर उतारते हुए, यह संस्थान युवाओं को उद्यमी (Entrepreneur) बनने के लिए प्रेरित करेगा।
अब छत्तीसगढ़ का युवा केवल राज्य या देश में नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए तैयार होगा।
क्रांति का दूसरा अध्याय: अनुभव की वापसी (आयु सीमा 45 वर्ष)
समाज और प्रशासन की सबसे बड़ी त्रासदी यह होती है कि कई बार 35-40 की उम्र पार करते ही बेहतरीन और अनुभवी प्रतिभाओं को ‘ओवरऐज’ मानकर हाशिए पर धकेल दिया जाता है। लेकिन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सदियों पुरानी व्यवस्था पर करारा प्रहार किया है।
विभिन्न शासकीय और संबद्ध संस्थाओं में अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का फैसला एक मास्टरस्ट्रोक है।
- परिपक्वता को मिलेगा मंच: 45 वर्ष की आयु वह पड़ाव है जब व्यक्ति के पास न केवल किताबी ज्ञान होता है, बल्कि ज़िंदगी और व्यवस्था की कड़वी-मीठी सच्चाइयों से लड़ने का ठोस अनुभव होता है।
- प्रतिभा पलायन (Brain Drain) पर रोक: जो अनुभवी युवा उम्र की सीमा के कारण निराश होकर अन्य राज्यों या प्राइवेट सेक्टर में मामूली नौकरियों के लिए मजबूर थे, वे अब राज्य के विकास में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सकेंगे।
- दूसरी पारी का शानदार अवसर: यह निर्णय उन हजारों महिलाओं और संघर्षशील युवाओं के लिए संजीवनी है, जिनकी उम्र पारिवारिक जिम्मेदारियों या आर्थिक तंगी से लड़ते हुए निकल गई।
युवा जोश और अनुभवी होश: एक अजेय समीकरण
कल्पना कीजिए उस विकास मॉडल की, जहां एनएसटीआई से निकला तकनीक से लैस एक 22 साल का ऊर्जावान युवा और 45 साल का एक परिपक्व, अनुभवी दिमाग एक साथ किसी योजना पर काम कर रहे हों। जोश और होश का यह तालमेल किसी भी राज्य को विकास के शिखर पर पहुंचा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ये दोनों फैसले अलग-अलग ज़रूर दिखते हैं, लेकिन इनकी आत्मा एक है— “मानव पूंजी (Human Capital) का उच्चतम उपयोग।” जहां एक ओर युवाओं को आसमान में उड़ने के लिए हुनर के पंख दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अनुभवी वर्ग को ज़मीन पर मजबूती से खड़े रहने का अवसर मिल रहा है।
आंकड़ों से आगे की बात
जब नीतियां फाइलों से निकलकर सीधे जनता के दिलों और उनके भविष्य को छूती हैं, तब वास्तविक सुशासन (Good Governance) नज़र आता है। छत्तीसगढ़ अब महज़ एक प्राकृतिक संसाधन वाला राज्य नहीं रह गया है; यह हुनरमंद हाथों और अनुभवी मस्तिष्कों का एक अभेद्य किला बन रहा है। निश्चित रूप से, यह कदम राज्य को विकास की उस बुलेट ट्रेन पर सवार करेगा, जिसकी मंज़िल एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ है।
