कहानी बदलाव की: महतारी वंदन ने बढ़ाया हौसला, सिलाई ने संवारी जिंदगी
रटगा की सोनू देवी अपने हुनर और सरकारी संबल से लिख रही हैं आत्मनिर्भरता की नई इबारत

रायपुर, 20 सितंबर 2026: सपने देखने की हिम्मत हर इंसान में होती है, लेकिन उन सपनों को उड़ान देने के लिए जब अपनों का साथ और शासन की योजनाओं का संबल मिल जाए, तो साधारण सी जिंदगी भी असाधारण सफलता की मिसाल बन जाती है। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रटगा की रहने वाली श्रीमती सोनू देवी की कहानी कुछ ऐसी ही प्रेरणा देती है। महतारी वंदन योजना और उनकी अपनी मेहनत ने मिलकर उनके जीवन की हर उलझन को ऐसे सींचा है कि आज उनका जीवन स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बन गया है।
हुनर तो था, पर सीमित थे साधन
श्रीमती सोनू देवी के हाथों में ईश्वर ने सिलाई का ऐसा हुनर दिया था कि कपड़ों को नया आकार देने की उनकी कला आसपास के इलाके में सराही जाती थी। वह घर पर ही रहकर कपड़े सिला करती थीं और परिवार की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में अपना योगदान देती थीं।
लेकिन, एक हुनरमंद कलाकार के सामने सबसे बड़ा रोड़ा सीमित आर्थिक संसाधन होते हैं। सोनू देवी के पास लगन और मेहनत की कोई कमी नहीं थी, पर पूंजी के अभाव में उनका काम घर की चारदीवारी तक ही सिमट कर रह गया था। आधुनिक मशीनरी, बेहतर गुणवत्ता वाले कपड़ों का स्टॉक या काम के विस्तार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। कई बार तंगहाली और आर्थिक सीमाओं के कारण उनके हौसले डगमगाने लगते थे, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वह जानती थीं कि अगर थोड़ा सा भी आर्थिक संबल मिल जाए, तो वह अपनी इस कला को एक नया आयाम दे सकती हैं।
महतारी वंदन योजना: बनी जीवन की टॉनिक और बदलाव की शुरुआत
सोनू देवी के जीवन में वह सुनहरा मोड़ तब आया जब छत्तीसगढ़ सरकार की बहुआयामी ‘महतारी वंदन योजना’ ने उनके जीवन में दस्तक दी। इस योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की नियमित मासिक आर्थिक सहायता ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।
शुरुआत में यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन एक संघर्षरत महिला के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं थी। सोनू देवी ने इस राशि का बड़ा ही सूझबूझ के साथ उपयोग किया। उन्होंने महतारी वंदन से मिली राशि और अपनी पुरानी टेलरिंग मशीन के तालमेल से अपने काम को नए सिरे से गति दी। जैसे-जैसे महीने बीतते गए, योजना के जरिए उनके खाते में नियमित रूप से सहायता राशि पहुंचती गई। हाल ही में उनके बैंक खाते में इस योजना की 31वीं किस्त भी सफलतापूर्वक जमा हो चुकी है। इस नियमित और निश्चिंत आमदनी ने उन्हें बिना किसी वित्तीय तनाव के अपने काम पर पूरी तरह फोकस करने की ताकत दी।
सिलाई से बढ़ते कदम, चौपालों से लेकर बाजारों तक गूंजा नाम
महतारी वंदन योजना के संबल से सोनू देवी के सिलाई के काम का दायरा अब तेजी से बढ़ने लगा है। अब वह केवल साधारण कपड़े ही नहीं, बल्कि आधुनिक फैशन के ट्रेंड के अनुसार कपड़ों की सिलाई करने लगी हैं। ग्रामीण अंचल में रहने के बावजूद उनकी कारीगरी की ख्याति अब आसपास के गांवों तक फैल चुकी है।
अब उनका घर सिर्फ एक साधारण कमरा नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ मिनी बुटीक बन गया है। इस काम से होने वाली आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को एक मजबूत सुरक्षा चक्र प्रदान किया है। अब उन्हें घर के छोटे-मोटे खर्चों या बच्चों की जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। उनके भीतर का आत्मविश्वास अब उनकी आंखों में साफ झलकता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया कृतज्ञता का भाव
अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और उनकी जनकल्याणकारी सोच को देते हुए श्रीमती सोनू देवी भावुक हो उठती हैं। वह कहती हैं, “महतारी वंदन योजना ने हम जैसी साधारण महिलाओं को समाज में एक नई पहचान और सम्मान दिलाया है। माननीय मुख्यमंत्री जी की इस योजना से जो नियमित आर्थिक संबल हमें मिला है, उसी की बदौलत आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हो पाई हूं।”
वह मानती हैं कि यह योजना केवल महिलाओं के बैंक खातों में पैसे डालने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की माताओं-बहनों के सपनों को पंख देने का एक बड़ा अभियान है।
मेहनत और संबल का अनूठा संगम
सोनू देवी की यह सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की नीति सही हो और नीयत साफ हो, तो समाज के अंतिम छोर पर बैठी महिला के जीवन में भी क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। रटगा की गलियों से शुरू हुई सोनू देवी की यह यात्रा आज जिले भर की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
उनकी यह दास्तान चीख-चीख कर यह कह रही है कि यदि महिलाओं को थोड़ा सा आर्थिक संबल और प्रोत्साहन मिल जाए, तो वे अपनी मेहनत के बल पर आसमान छू सकती हैं। महतारी वंदन योजना ने सोनू देवी के जीवन के अंधेरों को दूर कर उम्मीद और आत्मनिर्भरता का जो दीया जलाया है, वह आने वाली कई पीढ़ियों को प्रकाश देता रहेगा।
