छत्तीसगढ़ के आसमान से खुलेगा समृद्धि का द्वार: घटेगी भौगोलिक दूरी, थमेगी नहीं विकास की रफ्तार
‘मॉडिफाइड उड़ान योजना’ के नए चरण के लिए नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री मोदी और नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू का जताया आभार।
, 23 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ की तरक्की और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के बीच ‘मॉडिफाइड उड़ान (UDAN) योजना’ के नए चरण के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नई दिल्ली में आयोजित इस गरिमामय राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ शासन की ओर से विमानन सचिव श्री मुकेश बंसल ने इस ऐतिहासिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर राज्य की नई उड़ानों का खाका तैयार किया।
इस महा-समझौते पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह कदम प्रदेश की भौगोलिक दूरियों को समेटने और विकास की गति को कई गुना बढ़ाने वाला साबित होगा। बेहतर हवाई संपर्क स्थापित होने से न केवल बड़े महानगर बल्कि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और छोटे शहर भी अब सीधे देश के विमानन नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।
🏛️ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ से ही बनेगा ‘विकसित भारत’: केंद्र और राज्य का अटूट समन्वय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री के. राम मोहन नायडू के प्रति गहरा आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वित प्रयासों का ही परिणाम है कि छत्तीसगढ़ देश के तेजी से विस्तारित होते आधुनिक एविएशन इकोसिस्टम का एक बेहद मजबूत हिस्सा बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस हवाई क्रांति का सीधा लाभ राज्य के अंतिम छोर पर बैठे नागरिक को भी मिलेगा।
📈 पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार को लगेंगे नए पंख
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस योजना के बहुआयामी फायदों को रेखांकित करते हुए बताया कि जब आसमान से रास्ते सुगम होंगे, तो जमीन पर समृद्धि के द्वार अपने आप खुल जाएंगे:
- व्यापार और औद्योगिक निवेश: उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचना आसान होगा, जिससे भारी निवेश और नए उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
- सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन: छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक जलप्रपातों, प्राचीन धार्मिक स्थलों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों तक देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच सुगम होगी, जिससे स्थानीय होटल, परिवहन और गाइड जैसे व्यवसायों को भारी लाभ होगा।
- रोजगार की नई बहार: विमानन क्षेत्र के इस विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
🚁 हेली-कनेक्टिविटी: आपातकाल और आपदा प्रबंधन में बनेगा सुरक्षा कवच
इस संशोधित योजना की सबसे बड़ी खूबी दूरस्थ और पहुंचविहीन अंचलों में हेली-कनेक्टिविटी (Helicopter Connectivity) का विस्तार करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा जैसे दुर्गम और सुदूर क्षेत्रों में आधुनिक हेलीपैड बनने से आपातकालीन चिकित्सा सहायता (एयर एम्बुलेंस), प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित राहत कार्य और कानून-व्यवस्था के सुचारू संचालन में यह नेटवर्क एक सुरक्षा कवच और जीवनदायिनी की भूमिका निभाएगा।
📊 योजना की ताकत: देश भर में बनेंगे 100 हवाई अड्डे और 200 आधुनिक हेलीपैड
केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी रूपरेखा के अनुसार, अगले 10 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36) के लिए स्वीकृत इस मॉडिफाइड उड़ान योजना का कुल बजट ₹28,840 करोड़ रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी चरण के अंतर्गत:
- देश की मौजूदा अनुपयोगी और कम उपयोग वाली हवाई पट्टियों को अपग्रेड कर 100 नए हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे।
- पहाड़ी, दुर्गम, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड या हेलीपोर्ट्स का निर्माण होगा।
- योजना के तहत ‘चैलेंज मोड’ (Challenge Mode) पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, जिससे हवाई पट्टियों और बुनियादी ढांचों के निर्माण की समय-सीमा को घटाकर मात्र 18 महीने करने का लक्ष्य रखा गया है।
छत्तीसगढ़ के लिए नया सवेरा
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद अब छत्तीसगढ़ की अनुपयोगी हवाई पट्टियों के दिन बहुरने वाले हैं। राज्य की हवाई पट्टियों को अत्याधुनिक एयरपोर्ट और हेलीपैड में बदलकर कमर्शियल उड़ानों का परिचालन जल्द शुरू किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ को देश के आर्थिक और पर्यटन मानचित्र पर सबसे ऊपर स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
