छत्तीसगढ़ में मानसून की दोहरी चाल: कहीं छप्पर फाड़ बारिश, तो कहीं सूखे के आसार; बलरामपुर में 167% तो कांकेर में पड़ी भारी बेरुखी
विशेष रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में इस मानसूनी सीजन की उथल-पुथल और जिलों का जमीनी हाल

रायपुर, 23 सितंबर 2026 छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून अपनी अनोखी और अनिश्चित चाल से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी 23 सितंबर 2026 तक के ताजा और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में मानसून का असर बेहद मिला-जुला और हैरान करने वाला रहा है।
एक तरफ जहां बादलों की मेहरबानी से कई जिलों में नदियां उफान पर हैं और खेतों में बंपर फसल की उम्मीद जगी है, तो वहीं दूसरी तरफ कई इलाके पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते नजर आ रहे हैं। इस असमान बारिश ने कृषि प्रधान राज्य के माथे पर चिंता की लकीरें भी खींच दी हैं।
आंकड़ों की जुबानी: कुल औसत और पिछले 10 सालों का तुलनात्मक परिदृश्य
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में 1 जून से अब तक औसतन 1017.5 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों के औसत (1067.6 मिमी) का 95.3 प्रतिशत है। पहली नजर में यह आंकड़ा भले ही सामान्य के बेहद करीब या संतोषजनक लग रहा हो, लेकिन जब जिलों के भीतर जाकर आंकड़ों की गहराई से पड़ताल की जाती है, तो तस्वीर बिल्कुल उलट और डराने वाली नजर आती है—राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादलों की लुकाछिपी ने भारी असमानता पैदा कर दी है।
1. रिकॉर्ड तोड़ बारिश वाले जिले (जहां बरसे बदरा झमाझम)
इस मानसून सीजन में उत्तरी छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला सबसे बड़ा स्टार बनकर उभरा है। यहां बादलों ने ऐसी मेहरबानी बरसाई कि सारे पुराने रिकॉर्ड टूट गए।
- बलरामपुर: इस वर्ष यहां सामान्य से 167.9% अधिक यानी कुल 1504.5 मिमी भारी-भरकम बारिश दर्ज की गई है।
- अन्य बेहतर प्रदर्शन वाले जिले:
- सारंगढ़-बिलाईगढ़: 135.0%
- राजधानी रायपुर: 123.9%
- मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): 122.0%
- महासमुंद: 118.7%
- गरियाबंद: 116.2%
- सूरजपुर: 110.1%
- नारायणपुर: 109.7%
इसके अलावा मुंगेली (107.8%), बालोद (105.1%), धमतरी (104.8%), बलौदाबाजार (103.7%) और जांजगीर-चांपा (100.2%) में भी बारिश का ग्राफ सामान्य से ऊपर या बिल्कुल संतोषजनक रहा है।
2. मानसून की बेरुखी और सूखे की आहट झेलते जिले
एक तरफ जहां बाढ़ जैसे हालात हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के एक बड़े हिस्से में मानसून की बेरुखी ने किसानों की नींद उड़ा दी है।
- कांकेर जिला सबसे फिसड्डी: बस्तर संभाग के कांकेर जिले में इस बार सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। यहां सामान्य औसत की तुलना में मात्र 68.2% (985.9 मिमी) पानी ही बरसा है, जिसके चलते वहां सूखे के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं।
- अन्य कमजोर वर्षा वाले जिले:
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: 70.0%
- बेमेतरा: 72.1%
- सुकमा: 72.6%
- बीजापुर: 74.1%
- सरगुजा: 75.6%
- जशपुर: 78.8%
- कबीरधाम: 80.6%
साथ ही बस्तर (82.3%), कोंडागांव (83.2%), रायगढ़ (85.2%), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (88.6%), कोरबा (89.7%), राजनांदगांव (90.7%), दंतेवाड़ा (91.2%), शक्ति (93.4%), बिलासपुर (93.6%), कोरिया (95.4%) और दुर्ग (95.9%) में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही अटका हुआ है।
पिछले 24 घंटों का हाल: कोंडागांव में सबसे तीखे तेवर
बीते 24 घंटों (23 सितंबर) की बात करें तो दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में झमाझम बौछारें देखने को मिलीं।
- कोंडागांव में सबसे अधिक 41.7 मिमी पानी गिरा।
- इसके अलावा सुकमा में 33.5 मिमी, गरियाबंद में 32.0 मिमी, बस्तर में 30.2 मिमी, कांकेर में 23.1 मिमी, धमतरी में 22.0 मिमी और नारायणपुर में 21.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
- इसके विपरीत, सूरजपुर और कोरिया जिलों में आज बारिश पूरी तरह शून्य (0 मिमी) रही, जबकि अन्य कई जिलों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ीं। पूरे राज्य का आज का दैनिक औसत 9.5 मिमी दर्ज किया गया है।
किसानों की चिंताएं
छत्तीसगढ़ में मानसून का यह क्षेत्रीय असंतुलन कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक तरफ बलौदाबाजार, रायपुर और बलरामपुर के किसानों के चेहरे खिले हुए हैं, वहीं कांकेर, बेमेतरा और सरगुजा जैसे जिलों के किसान अपनी सूखी फसलों को बचाने के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। अब देखना यह होगा कि जाते-जाते मानसून इन सूखाग्रस्त इलाकों पर कितनी मेहरबानी दिखाता है।
