विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी

रायपुर, 06 अगस्त 2026: माननीय मुख्यमंत्री जी की प्रेस ब्रीफिंग में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, रोजगार और आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी-जी राम जी’ की विस्तृत रूपरेखा और उपलब्धियों को साझा किया गया। यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में 01 जुलाई 2026 से लागू हो चुका है, जिसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक प्रावधान किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ (मोर गांव मोर पानी महाअभियान) के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को हरी झंडी मिल गई है। इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम (प्रतीक्षालय सहित) और डिफेक्ट बोरवेल्स के रीचार्ज हेतु सैंड फिल्टर निर्माण के हजारों प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे ग्रामीण अंचलों की तस्वीर तेजी से बदलेगी।
प्रमुख उपलब्धियाँ और रैंकिंग (Achievements):
विभिन्न पोर्टल्स औरकार्यों के क्रियान्वयन में राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:
- ई-केवाईसी: देश के राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए श्रमिकों के ई-केवाईसी में 98% की शानदार उपलब्धि हासिल की है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 92% है।
- परिसंपत्तियों की जियो टैगिंग: देश में दूसरा स्थान प्राप्त करते हुए परिसंपत्तियों की जियो टैगिंग में 99% की उपलब्धि दर्ज की गई है (राष्ट्रीय औसत 91%)।
- मानव दिवस सृजन: वित्तीय वर्ष 2026-27 में माह अप्रैल से मार्च, 2026 तक 421 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं, जिससे राज्य देश के प्रथम 05 राज्यों में शामिल है।
- युक्तधारा पोर्टल: युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों की जीआईएस आधारित कार्ययोजना निर्माण में 99.99% की बेहतरीन उपलब्धि हासिल की गई है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 88% है।
वीबी-जी राम जी मिशन के मुख्य प्रावधान (Key Provisions):
- दैनिक मजदूरी में वृद्धि: ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी को 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
- कार्यों का दायरा: इस योजना के अंतर्गत कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है।
- कृषि अवधि का विशेष ध्यान: चरम कृषि अवधि में 60 दिवस तक कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है ताकि कृषि कार्यों के लिए श्रम की कमी न हो।
- फंडिंग और श्रेणियां: राशि आवंटन हेतु ग्राम पंचायतों को A, B, C कैटेगरी में बांटे जाने का प्रावधान है तथा ग्राम सभा से कार्ययोजना एवं कार्य का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है।
बजट और वित्तीय आवंटन (Budget Allocation):
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत और प्राप्त बजट के आंकड़े निम्नलिखित हैं (राशि करोड़ रुपये में):
| वित्तीय वर्ष 2026-27 | केंद्रांश (रुपये करोड़ में) | राज्यांश (रुपये करोड़ में) | कुल (रुपये करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| प्रस्तावित बजट | 3354.85 | 2236.57 | 5591.42 |
| प्राप्त बजट | 1006.46 | 670.97 | 1677.43 |
- विशेष व्यय: वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम 03 माह (अप्रैल से जून, 2026) के दौरान महात्मा गांधी नरेगा के तहत 1264 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।
जल संरक्षण और क्रियान्वयन के विशेष बिंदु (Water Conservation & Execution):
- मजदूरी-सामग्री अनुपात: जिला स्तर पर मजदूरी और सामग्री का 60:40 का अनुपात रखना अनिवार्य किया गया है।
- विकासखंडवार जल संरक्षण अनिवार्यता: NIWS/CGWB की रिपोर्ट के आधार पर जल उपलब्धता के दोहन के अनुसार विभिन्न विकासखंडों में जल संरक्षण कार्यों पर कुल व्यय की न्यूनतम सीमा तय की गई है:
- Critical (05 विकासखंड): न्यूनतम 65% व्यय जल संरक्षण पर।
- Semi-critical (21 विकासखंड): न्यूनतम 40% व्यय जल संरक्षण पर।
- Other (120 विकासखंड): न्यूनतम 30% व्यय जल संरक्षण पर।
बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्य (Infrastructure & Works):
योजना के तहत विभिन्न सामुदायिक और सार्वजनिक निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका विवरण इस प्रकार है:
- बालिका शौचालय निर्माण: ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे शासकीय विद्यालयों जहाँ बालिकाएं पढ़ती हैं, वहाँ वीबी-जी राम जी योजना से बालिका शौचालय (क्षेत्रफल 16.20 वर्ग मीटर / 174.15 वर्ग फीट) का निर्माण किया जाएगा। इसकी कुल लागत 4.30 लाख रुपये (मजदूरी 1.07 लाख / 25%, सामग्री 3.23 लाख / 75%) तय की गई है। ऐसे कुल 6,671 कार्यों के लिए 286.85 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है।
- मुक्तिधाम शेड एवं प्रतीक्षालय: गांवों में शवदाह गृह एवं प्रतीक्षालय (क्षेत्रफल 56 वर्ग मीटर) का निर्माण किया जाएगा, जिसकी कुल लागत 6.00 लाख रुपये (मजदूरी 1.70 लाख / 28%, सामग्री 4.30 लाख / 72%) है। इसके तहत कुल 6,524 कार्यों के लिए 391.44 करोड़ रुपये और अन्य 549 कार्यों के लिए 18.22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- मोर गांव मोर पानी महाअभियान (डिफ्ंक्ट बोरवेल रिचार्ज): ग्रामीण क्षेत्रों के डिफेक्ट बोरवेल में रिचार्ज संरचनाओं (सैंड फिल्टर और इंजेक्शन वेल) का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत 10,027 कार्यों के लिए कुल 52.14 करोड़ रुपये (मजदूरी 11.02 करोड़, सामग्री 41.12 करोड़) का प्रावधान किया गया है।
यह मिशन ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं और जल संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
विकसित भारत-जी राम जी योजना: ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार, हजारों नए कार्यों की मिली स्वीकृति
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ (मोर गांव मोर पानी महाअभियान) के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को हरी झंडी मिल गई है। इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम (प्रतीक्षालय सहित) और डिफेक्ट बोरवेल्स के रीचार्ज हेतु सैंड फिल्टर निर्माण के हजारों प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे ग्रामीण अंचलों की तस्वीर तेजी से बदलेगी।
प्रमुख स्वीकृतियाँ और आंकड़े (कुल योग एक नजर में)
राज्यभर में कुल स्वीकृत कार्यों के आंकड़े उत्साहजनक हैं, जो ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं:
- बालिका शौचालय: कुल 6,671 प्रस्तावित कार्यों में से 2,135 कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
- मुक्तिधाम निर्माण (प्रतीक्षालय सहित): कुल 6,524 प्रस्तावित कार्यों में से 789 कार्यों को मंजूरी मिली है।
- केवळ मुक्तिधाम निर्माण: 549 प्रस्तावों में से 159 कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
- सैंड फिल्टर निर्माण कार्य (डिफेक्ट बोरवेल्स): जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 10,027 प्रस्तावित कार्यों में से 1,843 कार्यों को स्वीकृत किया गया है।
कार्यों का तकनीकी विवरण और वित्तीय प्रावधान
पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कार्य का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय खाका तैयार किया गया है:
1. शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालय निर्माण
- यूनिट कॉस्ट: ₹4.30 लाख प्रति इकाई (मजदूरी: ₹1.07 लाख / 25%, सामग्री: ₹3.23 लाख / 75%)।
- तकनीकी विशेषताएँ: प्लिंथ क्षेत्रफल 4.50m x 3.60m (174.31 वर्ग फीट), बीम-कालम-आर.सी.सी. स्लैब संरचना (04 कालम्स), 2 यूरिनल्स, 2 WCs, 02 वाशबेसिन, रनिंग वाटर सप्लाई व्यवस्था, सेप्टिक टैंक और दिव्यांगों के लिए रैंप का विशेष प्रावधान।
2. मुक्तिधाम शेड एवं प्रतीक्षालय निर्माण
- यूनिट कॉस्ट: ₹6.00 लाख प्रति इकाई (मजदूरी: ₹1.70 लाख / 28%, सामग्री: ₹4.30 लाख / 72%)।
- तकनीकी विशेषताएँ: प्लिंथ एरिया 56.00 वर्ग मीटर (602.56 वर्ग फीट), 5.6m x 3.6m वेटिंग एरिया, बीम-कालम-आर.सी.सी. स्लैब संरचना (06 से 08 कालम्स), बैठने के लिए प्लेटफॉर्म, स्टील गेट सहित 1 मीटर ऊँची पैरापेट वॉल, धुआँ निकासी हेतु रेड स्लैब (चिमनी), और क्रिमेशन बेड (एंगल फ्रेम-लकड़ी सपोर्ट हेतु)।
3. डिफेक्ट बोरवेल हेतु सैंड फिल्टर एवं रीचार्ज संरचना निर्माण
- यूनिट कॉस्ट: ₹0.52 लाख (मजदूरी: ₹0.11 लाख / 21%, सामग्री: ₹0.41 लाख / 79%)।
- तकनीकी विशेषताएँ: ब्रिक वर्क का सिल्ट चैंबर (2m व्यास, 1.7m गहरा), फिल्टर मीडिया (सबसे नीचे स्टोन बोल्डर 40 सेमी मोटाई, उसके ऊपर 10 मिमी एवं कम साइज की गिट्टी 30 सेमी मोटाई, और सबसे ऊपर मोटी रेत 30 सेमी मोटाई), सिल्ट चैंबर को रीचार्ज शाफ्ट से जोड़ने हेतु 110 एम.एम. व्यास का पी.वी.सी. तिरछा पाइप तथा स्लोटेड होल्स युक्त रीचार्ज शाफ्ट चैंबर।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
इन विकास कार्यों के क्रियान्वयन से न केवल गांवों में स्वच्छता, संवेदनशीलता और जल संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मनरेगा और अन्य माध्यमों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा, जिससे ग्रामीण नागरिकों का जीवन स्तर और अधिक सुगम हो सकेगा।
