राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क निर्माण में ‘बड़ा खेल’: गंभीर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित
जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष की शिकायत पर PWD मुख्यालय में हड़कंप, 3 दिन के भीतर जांच टीम को सौंपनी होगी रिपोर्ट, दोषियों पर गिरेगी गाज

विशेष संवाददाता
नवा रायपुर अटल नगर 3 अक्टूबर :
छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं में हुए कथित गंभीर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और बेहद घटिया निर्माण कार्य को लेकर विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) विजय कुमार भतपहरी ने एक आदेश जारी कर हाई-लेवल जांच समिति का गठन कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस समिति को मात्र 03 दिनों के भीतर अपनी पूरी रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया गया है, जिससे साफ है कि इस मामले में बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों पर गाज गिरना तय है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, राजनांदगांव के उपाध्यक्ष श्री भरत लाल वर्मा द्वारा 25 सितंबर 2026 को की गई एक बेहद तीखी और तथ्यात्मक शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने राजनांदगांव-खैरागढ़ मुख्य मार्ग के नवीनीकरण और उन्नयन कार्य के साथ-साथ राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार की परतें खोली थीं। शिकायत में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि सड़कों के निर्माण में तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर जनता के पैसे का खुलेआम दुरुपयोग किया गया है।
इन 6 मुख्य बिंदुओं पर अटकी है अफसरों की सांसें
शिकायतकर्ता की मांग और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख अभियंता ने जांच के जो बिंदु तय किए हैं, वे निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अफसरों की रातों की नींद उड़ाने वाले हैं:
- स्वतंत्र संस्था से जांच: राजनांदगांव-खैरागढ़ और मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं की किसी बड़ी और स्वतंत्र थर्ड-पार्टी संस्था से उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
- लैब में खुलेगी पोल: सड़क की मोटाई, डामरीकरण (Bitumen) की मात्रा, GSB, WMM सब ग्रेड, घनत्व, ग्रेडेशन, लेवल और उतार-चढ़ाव (Undulation) सहित सभी तकनीकी मानकों की प्रयोगशाला (Lab) में गहन जांच होगी।
- अफसरों और एजेंसियों की भूमिका: घटिया निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी/ठेकेदार की भूमिका की बारीकी से जांच होगी।
- भुगतान पर रोक पर विचार: जांच पूरी होने तक संबंधित ठेकेदारों और एजेंसियों के करोड़ों रुपये के भुगतान (Payment) को रोकने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई: यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता, वित्तीय हेराफेरी अथवा भ्रष्टाचार साबित होता है, तो संबंधितों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर और निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- खोदकर छोड़ी सड़कों पर तल्ख तेवर: डोंगरगांव-कुमरदा सहित जिन स्थानों पर सड़कों को उखाड़कर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है, वहां जनता की सुरक्षा के लिए तत्काल मरम्मत करने, चेतावनी संकेत (Sign boards) लगाने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
4 सदस्यीय ‘सुपर कॉप’ कमेटी करेगी दूध का दूध और पानी का पानी
इस महा-घोटाले की जांच के लिए प्रमुख अभियंता ने विभाग के सबसे अनुभवी और कड़क अधिकारियों की 4 सदस्यीय टीम मैदान में उतारी है। इस समिति में शामिल हैं:
- श्री वी.एस. कोरम – मुख्य अभियंता (योजना), कार्यालय प्रमुख अभियंता, लो.नि.वि. नवा रायपुर (जांच प्रमुख)
- श्री राजीव नशीने – अधीक्षण अभियंता, लो.नि.वि. मंडल क्र. 1, रायपुर
- श्री प्रभात सक्सेना – कार्यपालन अभियंता, लो.नि.वि. संभाग क्र. 2, रायपुर
- श्री सी.एस. ओगरे – कार्यपालन अभियंता, लो.नि.वि. संभाग क्र. 1, रायपुर
72 घंटे का अल्टीमेटम: विभाग में मची खलबली
प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात इसकी ‘डेडलाइन’ है। समिति को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे 03 दिवस के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सीधे अधोहस्ताक्षरकर्ता (प्रमुख अभियंता) को सौंपें। जानकारों का मानना है कि केवल 72 घंटों का समय दिया जाना यह दर्शाता है कि शासन इस मामले को दबाने के मूड में बिल्कुल नहीं है और मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री के निर्देश पर भ्रष्टाचार के खिलाफ यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की गई है। अब देखना यह होगा कि 3 दिन बाद जब इस समिति का लिफाफा खुलेगा, तो विभाग के कौन-कौन से ‘बड़े मगरमच्छ’ इसकी जद में आते हैं।
