राजनांदगांव के ‘ज्ञान मानसरोवर’ में आस्था का सैलाब: महापौर और ब्रह्माकुमारीज ने प्रज्वलित किए ‘सद्भावना दीप’
चैतन्य देवियों की अलौकिक झांकी दे रही ‘स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन’ का संदेश; आंतरिक बुराइयों को त्याग कर दैवीय गुण अपनाने की अपील

राजनांदगांव, 13 अक्टूबर। संस्कारधानी राजनांदगांव के गौरवशाली आध्यात्मिक केंद्र ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ‘ज्ञान मानसरोवर’ परिसर में इन दिनों भक्ति, शक्ति और वैश्विक शांति का एक ऐसा अनुपम महासंगम देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे शहर को दिव्य तरंगों से सराबोर कर दिया है। शारदीय नवरात्रि के पावन उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा ज्ञान मानसरोवर में सजाई गई अलौकिक चैतन्य देवियों की झांकी श्रद्धालुओं के लिए परम शांति और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। इसी पावन श्रृंखला में बीती संध्या (12 अक्टूबर), यह परिसर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव का साक्षी बना, जब नगर के प्रथम नागरिक, जनप्रतिनिधियों और संस्था की वरिष्ठ साधिकाओं ने विश्व कल्याण के संकल्प के साथ ‘सद्भावना दीप’ प्रज्वलित किया।
अध्यात्म और राजसत्ता का अनूठा मिलन
इस भव्य आध्यात्मिक महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर मधुसूदन यादव उपस्थित रहे। उनके साथ नगर निगम के सक्रिय पार्षद गण– दुरेंद्र साहू, सावन वर्मा, शैंकी बग्गा, जैनम बैद, मनोहर यादव एवं सेवक उईके ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। सामाजिक समरसता को बल देने के लिए पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप साहू भी इस पावन दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का हिस्सा बने।
ज्ञान मानसरोवर सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी, कुन्ती दीदी, प्रभा दीदी, रम्भा दीदी एवं ब्रह्माकुमार मुरलीधर सोमानी भाई के दिव्य सानिध्य में वैदिक और आध्यात्मिक मंत्रोच्चार के बीच अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। दीपों की आभा और देवियों के चैतन्य स्वरूप ने पूरे वातावरण को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया।
“स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन” का महा-संदेश
ज्ञान मानसरोवर संस्थान की ओर से इस भव्य आयोजन के माध्यम से समाज को “स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन” का मुख्य आध्यात्मिक संदेश दिया गया। सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने इस संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि, “नवरात्रि केवल बाहरी उत्सव या उपवास तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है अपने भीतर छिपे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी आसुरी वृत्तियों की बलि देना। जब हर मनुष्य राजयोग के माध्यम से स्वयं को बदलेगा और दैवीय गुणों को धारण करेगा, तभी एक मूल्यनिष्ठ और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण होगा।”
“ज्ञान मानसरोवर समाज को दे रहा नई दिशा” – महापौर
दीप प्रज्वलन के पश्चात विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए महापौर मधुसूदन यादव ने ज्ञान मानसरोवर के इस पावन प्रयास की सराहना करते हुए कहा, “आज के इस तनावपूर्ण युग में जहां इंसान मानसिक शांति की तलाश में भटक रहा है, वहीं ज्ञान मानसरोवर परिसर समाज को अपनी आंतरिक शक्तियों को जगाने का मार्ग दिखा रहा है। यह सद्भावना दीप केवल एक दीया नहीं है, बल्कि समाज से नफरत, वैमनस्य और अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आपसी प्रेम, भाईचारे और शांति का प्रकाश फैलाने का महा-संकल्प है।”
दमदार व्यवस्था और उमड़ती अगाध श्रद्धा
सेवा केंद्र प्रमुख ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी के कुशल व सुदृढ़ संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान झांकी दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पार्षदों और प्रबुद्ध जनों ने ज्ञान मानसरोवर के अनुशासित, स्वच्छ और अत्यंत पवित्र वातावरण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस पावन अवसर पर सभी अतिथियों को संस्थान की ओर से ईश्वरीय सौगात और पवित्र टोली (प्रसाद) भेंट कर सम्मानित किया गया।
ज्ञान मानसरोवर में आयोजित यह महोत्सव राजनांदगांव के इतिहास में न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक समरसता और अखंड वैश्विक भाईचारे की एक बेमिसाल मिसाल के रूप में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
