छत्तीसगढ़ में अन्नदाताओं की बल्ले-बल्ले: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा फैसला, प्रदेश में 250 से अधिक नए धान खरीदी केंद्रों को मिली मंजूरी
- किसानों को दूर जाने की मजबूरी से मिलेगी मुक्ति, घर के पास ही सुगमता से बेच सकेंगे अपनी उपज
- मुख्यमंत्री बोले- “अन्नदाताओं को धान बेचने में सुविधा देना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता”
- पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल टोकन और 48 घंटे में सीधे खाते में भुगतान का ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ देश में पेश कर रहा मिसाल

विशेष संवाददाता
रायपुर, 15 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने खरीफ विपणन सीजन की शुरुआत से ठीक पहले प्रदेश के अन्नदाताओं को एक और बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए पूरे छत्तीसगढ़ के भीतर 250 से अधिक नए धान खरीदी केंद्रों की स्थापना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब सुदूर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी और वे पूरी सुगमता के साथ अपनी उपज को नजदीकी केंद्र में बेच सकेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा करते हुए कहा, “हमारी सरकार पूरी तरह से किसान-हितैषी सरकार है। प्रदेश के किसानों को धान बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें अपनी मेहनत की कमाई का एक-एक पैसा बिना किसी परेशानी के मिले, इस उद्देश्य से राज्य में 250 से अधिक नए उपार्जन केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। यह फैसला छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की समृद्धि और खुशहाली के संकल्प को आगे बढ़ाएगा।”
लंबी लाइनों और परिवहन की समस्या से मिलेगी राहत
कृषि विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नए केंद्रों की मंजूरी से मौजूदा केंद्रों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव काफी कम हो जाएगा। किसानों को टोकन कटवाने, बारदाने के लिए इंतजार करने या परिवहन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहने की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह निर्णय वरदान साबित होगा, क्योंकि अब उनके गांवों के समीप ही धान खरीदी की मुकम्मल व्यवस्था होगी।
देश के लिए मिसाल बना छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल वर्तमान में पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है। सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले सीजन में रिकॉर्ड धान की खरीदी दर्ज की गई थी। राज्य के उपार्जन केंद्रों में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल टोकन प्रणाली, बायोमेट्रिक सत्यापन और 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में भुगतान (बैंक लिंकिंग व्यवस्था) ने पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी, तेज और बिचौलियों से मुक्त बना दिया है।
संयुक्त खाताधारकों के लिए ‘लम्बरदार व्यवस्था’ से दोहरी खुशी
इस वर्ष धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार ने एक और ऐतिहासिक सुधार करते हुए ‘लम्बरदार व्यवस्था’ को बहाल किया है। पहले संयुक्त भूमि खातों पर एग्री स्टेक पंजीयन की तकनीकी अनिवार्यताओं के कारण ग्रामीण परिवारों में आपसी विवाद और दफ्तरों के चक्कर काटने जैसी परेशानियां आ रही थीं। लेकिन मुख्यमंत्री साय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस नियम को सुगम बना दिया है। अब संयुक्त खाते वाली जमीनों में परिवार के मुखिया यानी ‘लंबरदार किसान’ का एक ही पंजीयन पूरे परिवार का धान बेचने के लिए मान्य होगा।
प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में
नए 250 से अधिक केंद्रों की स्वीकृति के साथ ही खाद्य विभाग और जिला प्रशासनों को मुस्तैद कर दिया गया है। सभी केंद्रों पर बारदाने की उपलब्धता, साफ-सफाई, कंप्यूटर-इंटरनेट सेटअप, पेयजल और किसानों के बैठने के लिए छायादार छाया जैसी बुनियादी सुविधाओं को समय से पहले पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। 15 नवंबर के आसपास शुरू होने जा रही इस महा-खरीदी को लेकर किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार के इस ‘दमदार और जानदार’ कदम ने यह साफ कर दिया है कि विष्णु देव साय सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में सिर्फ और सिर्फ छत्तीसगढ़ का किसान है।
