भक्ति का महासंगम: ज्ञान मानसरोवर में चैतन्य देवियों की जीवंत झांकी देखने उमड़ा आस्था का सैलाब
– ब्रह्माकुमारी पुष्पा बहन के कुशल नेतृत्व में सजाया गया देवी स्वरूपों का अलौकिक दरबार
– महापौर मधुसूदन यादव ने किया शुभारंभ; उद्योगपतियों, राजनेताओं, डॉक्टरों और समाज प्रमुखों सहित वर्ल्ड चैंपियन ने टेका मत्था
– राजनांदगांव में अध्यात्म और भारतीय संस्कृति की अनूठी मिसाल, जीवंत देवियों के दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु

राजनांदगांव 21 अक्टूबर ।
शारदीय नवरात्रि के पावन और पुनीत पर्व पर संस्कारधानी राजनांदगांव में भक्ति, शक्ति और अध्यात्म का एक ऐसा अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जिसने हर शहरवासी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, राजनांदगांव द्वारा ज्ञान मानसरोवर परिसर में आयोजित ‘चैतन्य देवियों की भव्य एवं अलौकिक झांकी’ इस वर्ष पूरे अंचल में आकर्षण का केंद्र बनी रही। ब्रह्माकुमारी पुष्पा बहनजी के गरिमामय नेतृत्व एवं कुशल मार्गदर्शन में सजी इस अलौकिक झांकी के दर्शन के लिए नौ दिनों तक श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर ‘जय माता दी’ और आध्यात्मिक तरंगों से गुंजायमान हो उठा। देवी स्वरूपों की अपूर्व और जीवंत प्रस्तुति को देखकर श्रद्धालु न केवल भावविभोर हुए, बल्कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा में दैवीय चेतना का अनुभव कर असीम पुण्य लाभ अर्जित किया।

महापौर ने किया भव्य शुभारंभ, पहले दिन से लगी कतारें
आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने वाली इस अनूठी झांकी का विधिवत गरिमामय शुभारंभ राजनांदगांव के महापौर मधुसूदन यादव द्वारा किया गया। उद्घाटन के प्रथम पल से ही ज्ञान मानसरोवर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं के आगमन का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह समापन की अंतिम आरती तक अविरल जारी रहा। आकर्षक विद्युत सज्जा, मनमोहक फूलों की सजावट और सबसे बढ़कर चैतन्य देवियों के रूप में विराजमान साधिकाओं की एकाग्रता व दिव्य मुस्कान ने लोगों का मन मोह लिया। झांकी को देखने के लिए न केवल राजनांदगांव शहर, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी हजारों की संख्या में माता के भक्त पहुंचे।
संस्कारधानी के दिग्गजों और गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामय उपस्थिति
इस नौ दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव में समाज के हर वर्ग, धर्म और संगठन के प्रमुखों ने हाजिरी लगाई। देवी आराधना के इस पावन मंच पर अपनी श्रद्धा निवेदित करने पहुंचने वाले प्रमुख गणमान्य नागरिकों में:
- अध्यात्म व राजनीति के शीर्ष चेहरे: प्रसिद्ध भागवताचार्य विनोद बिहारी गोस्वामी, वरिष्ठ भाजपा नेता खूबचंद पारख, और डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू।
- विशिष्ट सम्मान व चिकित्सा जगत: पद्मश्री डॉ. पुखराज बाफना, प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सादानी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सादानी और डॉ. साधना तिवारी।
- चौथा स्तंभ (वरिष्ठ संपादक): ‘दैनिक सबेरा संकेत’ के संपादक सुशील कोठारी, ‘भास्कर दूत’ के संपादक दुष्यन्तदास, ‘दावा’ के संपादक सूरज बुद्धदेव और राजनांदगांव रत्न शारदा तिवारी।
- सामाजिक व व्यापारिक नेतृत्व: माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष सत्यनारायण डागा, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष सुशील अग्रवाल, सिंधी समाज के अध्यक्ष मंशाराम मोटलानी, लायंस क्लब अध्यक्ष दीपक नवलखा, लायन अमित खंडेलवाल, प्रसिद्ध व्यवसायी गौतम छाजेड़, चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद डढ्ढा और प्रतिष्ठित ठेकेदार संजय सिंगी।
- खेल जगत के गौरव: वेटलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियन (गोल्ड मेडलिस्ट) सितलेश पटेल और राज्य स्तरीय शतरंज चैंपियन स्वर्णा वर्मा।
- न्याय व प्रशासनिक क्षेत्र: अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नारायण कन्नौजे, पूर्व अध्यक्ष मनोज चौधरी और जिला पंचायत के सेवानिवृत्त उप संचालक राकेश ठाकुर।
इन सभी विशिष्ट अतिथियों ने चैतन्य देवियों की आरती उतारकर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। सभी ने एक स्वर में ब्रह्माकुमारी संस्थान के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे आत्मिक शांति का केंद्र बताया।
अध्यात्म और भारतीय संस्कृति का दमदार संदेश
इस सफल आयोजन के माध्यम से ब्रह्माकुमारी संस्थान ने समाज को केवल मूर्ति पूजा से आगे बढ़कर गुणों की पूजा करने का एक अत्यंत प्रभावशाली संदेश दिया। ब्रह्माकुमारी पुष्पा बहनजी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि, “नारी केवल हाड़-मांस का पुतला नहीं, बल्कि शक्ति का साक्षात स्वरूप है। जब आत्मा पवित्र और ध्यानमग्न होती है, तो वह देवी तुल्य बन जाती है।” झांकी के माध्यम से समाज में कन्या भ्रूण हत्या रोकने, नारी शक्ति के सम्मान, व्यसनमुक्ति और आंतरिक पवित्रता अपनाने का जो संदेश दिया गया, उसने हर आगंतुक के दिल को छू लिया।
विशिष्ट साज-सज्जा, मधुर आध्यात्मिक संगीत की धुनों और चैतन्य देवियों की पलक झपकाए बिना बैठी ध्यानमग्न मुद्राओं ने एक ऐसा अलौकिक समां बांधा, जिसकी चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। इस सफल और भव्य आयोजन ने संस्कारधानी राजनांदगांव के इतिहास में भक्ति और ज्ञान का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है।
