राजनीति के एक ‘सरल युग’ का अंत: अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से छत्तीसगढ़ स्तब्ध, मुख्यमंत्री साय ने जताया गहरा शोक

विशेष प्रतिनिधि 30 अक्टूबर | रायपुर/भिलाई
छत्तीसगढ़ की राजनीति ने अपना एक और अनमोल रत्न खो दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दुर्ग जिले की हाईप्रोफाइल अहिवारा विधानसभा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा जी का निधन हो गया है। उनके आकस्मिक अवसान की खबर मिलते ही समूचे प्रदेश सहित राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। जमीन से जुड़े एक संवेदनशील जननेता के इस तरह चले जाने से अहिवारा क्षेत्र की जनता और भाजपा संगठन गहरे सदमे में है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस खबर से पूरी तरह स्तब्ध हैं। श्री कोर्सेवाड़ा का जाना छत्तीसगढ़ भाजपा और प्रदेश के लिए एक युग का अंत जैसा है।
“जनसरोकार और सरलता की प्रतिमूर्ति थे कोर्सेवाड़ा जी” — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से एक बेहद भावुक संदेश जारी किया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा:
“भाजपा परिवार के वरिष्ठ नेता एवं अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा जी के निधन की सूचना से स्तब्ध हूँ। सरल व्यक्तित्व, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा उनकी विशेष पहचान रही। क्षेत्र की जनता के सुख-दुःख में सदैव साथ खड़े रहने वाले श्री कोर्सेवाड़ा जी का जाना हम सभी के लिए गहरी पीड़ा का विषय है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”
मुख्यमंत्री ने आगे ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा, “प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकसंतप्त परिजनों और उनके सभी स्नेहीजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करें। ॐ शांति।”
संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और अद्वितीय राजनीतिक सफर
श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा केवल एक विधायक नहीं थे, बल्कि वे भाजपा के उन स्तंभों में से थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ में संगठन को सींचने का काम किया। आपातकाल के दौर से लेकर राज्य गठन और उसके बाद तक, उन्होंने हर परिस्थिति में पार्टी का झंडा बुलंद रखा। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे बड़े से बड़े पद पर रहने के बावजूद हमेशा आम कार्यकर्ता के लिए सुलभ रहे।
- अहिवारा के सुख-दुख के साथी: क्षेत्र की जनता के बीच वे ‘विधायक’ कम और परिवार के बड़े बुजुर्ग ज्यादा माने जाते थे। सुख हो या दुख, आधी रात को भी वे जनता के बीच खड़े नजर आते थे।
- सादगी ऐसी जो मिसाल बन गई: तामझाम से दूर, बेहद शांत और गंभीर स्वभाव के कोर्सेवाड़ा जी ने राजनीति में शुचिता और सरलता की एक ऐसी लकीर खींची है, जिसे मिटाना नामुमकिन होगा।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब, राजनीतिक दलों में शोक
जैसे ही उनके निधन की खबर अहिवारा और भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में फैली, उनके निवास पर अंतिम दर्शन करने वाले समर्थकों और आम जनता का तांता लग गया। हर आंख नम थी और हर जुबां पर उनकी सादगी के किस्से थे।
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रियों सहित विपक्ष के नेताओं ने भी उनके निधन को छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा वैक्यूम (शून्य) बताया है। नेताओं का कहना है कि कोर्सेवाड़ा जी जैसा अजातशत्रु नेता, जिसका कोई दुश्मन न हो, आज के दौर में मिलना दुर्लभ है।
छत्तीसगढ़ की माटी का यह सच्चा सपूत भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया है, लेकिन जनसेवा, संगठन निष्ठा और सादगी का जो अध्याय वे लिख गए हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक का काम करेगा।
