धान खरीदी 2026-27: छत्तीसगढ़ सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, प्रदेश भर में नए धान उपार्जन केंद्रों को मिली हरी झंडी!
राजधानी रायपुर समेत बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर और बस्तर तक फैला केंद्रों का जाल; नवीन व पुरानी समितियों में उपार्जन केंद्रों की सूची जारी, किसानों को घर के पास मिलेगी धान बेचने की सहूलियत।

विशेष संवाददाता, 30 अक्टूबर रायपुर
छत्तीसगढ़ में इस बार धान खरीदी का महापर्व किसानों के लिए और भी सुगम और शानदार होने जा रहा है। राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत प्रदेश के सभी जिलों में धान उपार्जन केंद्रों (Paddy Procurement Centers) की स्थापना और नवीन समितियों को मंजूरी दे दी है। शासन द्वारा जारी इस महा-सूची में रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बस्तर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग सहित तमाम जिलों के नए व पुराने उपार्जन केंद्रों को विधिवत स्वीकृति दी गई है।
इस फैसले से अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और परिवहन खर्च दोनों की भारी बचत होगी।
📌 संभाग और जिलों के अनुसार बड़ा फेरबदल: कहाँ क्या मिली स्वीकृति?
1. रायपुर संभाग: राजधानी और आसपास के जिलों में बंपर विस्तार
- रायपुर जिला: रायपुर जिले में पुरानी समितियों के अंतर्गत नवीन उपार्जन केंद्रों की झड़ी लगा दी गई है। इसमें पवनी, परसतराई, मालीडीह, बोहरडीह, बनरसी, चरौदा, बकतरा, हसदा, उमरपोटी, मरेगा, अकोलीकला, अमेठी, तोंडगांव, समोदा, भुरसुदा, भुनिया, मुनगी, तुलसी, और मोहगांव जैसी नवीन समितियों में उपार्जन की सीधी स्वीकृति दी गई है। वहीं तिल्दा ब्लॉक के अंतर्गत भडहा और खपरीडीहखुर्द में भी पुरानी समितियों से उपार्जन को मंजूरी मिली है।
- बलौदाबाजार जिला: यहाँ कोटियाडीह, कोसमररा (ब), ताराशिव, बम्हनपुरी, धवई, पनगांव जैसी नवीन समितियों में धान खरीदी की जाएगी। साथ ही कोदवा और दतरेंगी में पुरानी समितियों के माध्यम से केंद्रों को हरी झंडी दिखाई गई है।
- महासमुंद व गरियाबंद: महासमुंद में डोंगरगांव, झिटकी, बोइरगांव, कलमीदादर, कौसरा, नवागांवकला, बरौली, मुनगाडीह, और कोसमपाली को नवीन केंद्र बनाया गया है, जबकि बसना और सरायपाली क्षेत्र के संतपाली, गिधली, जम्हर, किसडी, तुरेंगा और सिनोधा में भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गरियाबंद में फिगेश्वर और छुरा ब्लॉक के जामगांव व अतरमरा को भी शामिल किया गया है।
2. दुर्ग संभाग: दुर्ग, बेमेतरा और कबीरधाम में मज़बूत नेटवर्क
- दुर्ग और बालोद: दुर्ग जिले में धनोरा, गनियारी, कातरो, अरसी, पेन्ड्री, नदवाय, सेमरिया, खजरी, और मेडेसरा जैसे दर्जनों केंद्रों पर इस बार रौनक दिखेगी। बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लॉक सहित विभिन्न क्षेत्रों में मटिया बी, धनौंपुर, आरला, बुढ्ढरदा बनहरदी, बोइरडीह, केसाल, बुचाटोला, और मुडिया जैसे केंद्रों को चाक-चौबंद किया गया है।
- बेमेतरा जिला: साजा, नवागढ़ और बेरला ब्लॉक के अंतर्गत भरदालोधी, हथमुडी, चीचगांव, बिलई, टेंगनाभाठ, बाधुल, बिरसिंघी, नादेल, गाड़ामोर, तोरा, तियरेया, बहिँगा, रेवे, और दनदनी में पुराने केंद्रों से सुचारू रूप से उपार्जन सुनिश्चित किया गया है।
- कबीरधाम (कवर्धा): यहाँ सबसे सघन नेटवर्क तैयार किया गया है। छाटा झा, बरहटटी, खारा, कुसुमघटा, खरहट्टा, बेहरासरी, भातचुवा, कबराटोला, बुधवारा, देहानहीँ, खड़ीदादर, सिली पचराही, सूखाताल, रैतापारा, पाढ़ी, मुनगाडीह, चतरी, पोलमी, छिरपानी, पैलपार, सिंगारपुर, रैगाटोला, टाटीकसा, और डोंगरिया समेत दर्जनों गांवों को धान उपार्जन की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
3. बिलासपुर संभाग: बिलासपुर, मुंगेली और कोरबा में बड़ी राहत
- बिलासपुर: बिलासपुर जिले के तखतपुर, मस्तूरी और कोटा ब्लॉक में चर्नाडोंगरी, कबरकापा, बेलमुण्डी, बिटकुला, सेमरिया, और बेलसरा जैसे केंद्रों को किसानों की सहूलियत के लिए अधिकृत किया गया है।
- मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जी.पी.एम.): जी.पी.एम. के करगीकला और कोरजा को नवीन समिति का दर्जा मिला है। वहीं मुंगेली के लोरमी, पथरिया और पोंडी ब्लॉक में झड़पुरी, पथरी, डोगरीगढ़, जकड़बाँधा, छिन्द्भोग, करूपान, फूलवारी, और शीतलदाह में धान खरीदी की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
- कोरबा और रायगढ़: कोरबा के कटघोरा में मुडहाली और चोरहा को मंजूरी मिली है, जबकि रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में नदेली, लोहरसिंघ, ओडेकेरा, नवापारा-अ, झलमला, अमुर्रा, बरगांव, धनीगांव, देवसागर, रोहिना, टाटा, और अमलीपाली (म) जैसे सुदूर क्षेत्रों तक केंद्रों का विस्तार किया गया है।
4. बस्तर और सरगुजा संभाग: आदिवासी अंचलों में सुगम व्यवस्था
- बस्तर संभाग (बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर): बस्तर के जगदलपुर और बकावंड ब्लॉकों में काकरवाड़ा, धुरागंाव, बागमोहलई, संतोषा, कुंडकानार, नदपुरा, सीतपुर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में केंद्र खोले गए हैं। कांकेर के अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा में नवागांव (गोड़री), लक्ष्मीपुर, कलैपरस, नागरबेडा, पानीडोबीर, मनकेसर, किसकोडो, प्रेमनगर, ईरकबूट्टा, स्वरूप नगर, और मेहड़ा में विशेष व्यवस्था की गई है ताकि वनांचल के किसानों को भटकना न पड़े।
- सरगुजा संभाग (सरगुजा, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर): सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, लुंड्रा, लखनपुर, प्रतापपुर, और रामानुजनगर ब्लॉकों में खालीबा, पडोली, अंधला, चकेरी, सिहार, परसागुडी, सिलौटी, चेरा, पचवल, जजावल, दुलदुली, रामतीर्थ, तियरागुडी, बुढिया, और बड़सरा को धान खरीदी केंद्रों के रूप में मंजूरी दी गई है। कोरिया के बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ के मनसुख, गानमान, उधनापुर, कदरैया, और देवाडांड में भी व्यवस्था पुख्ता की गई है।
⚠️ राजनांदगांव जिले के लिए जरूरी सूचना
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राजनांदगांव जिला अंतर्गत कसारी एवं कनेरी नवीन समितियां, जो पूर्व से ही उपार्जन केंद्र हैं, उनकी पुनः स्वीकृति दी गई है। इन्हें इस मुख्य सूची में अलग से शामिल नहीं करते हुए यथावत रखा गया है।
- बिचौलियों पर कड़ा प्रहार: गांवों के ठीक पास केंद्र खुल जाने से कोचियों और बिचौलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। किसान सीधे सरकार को अपनी फसल बेच सकेंगे।
- न्यूनतम परिवहन लागत: धान को दूर मंडियों तक ले जाने का भाड़ा बचेगा, जिससे किसानों की शुद्ध आय में बढ़ोतरी होगी।
- भीड़ और कतारों से मुक्ति: केंद्रों की संख्या बढ़ने से धान डंप होने की समस्या खत्म होगी और बारदाने से लेकर तौल प्रणाली तक सब कुछ सुचारू रूप से चलेगा।
: छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम प्रदेश के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले इस राज्य में कृषि समृद्धि को एक नए मुकाम पर ले जाने वाला साबित होगा। इस पुख्ता तैयारी से साफ है कि आगामी धान खरीदी सीजन में प्रदेश का किसान बिना किसी परेशानी के अपनी मेहनत का सही मोल पा सकेगा।
