छत्तीसगढ़ में किफायती परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा को बड़ा बढ़ावा: मंत्रालय महानदी भवन में हुई SATAT योजना की उच्चस्तरीय बैठक संपन्न
- अध्यक्षता: श्री सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग एवं मुख्यमंत्री
- स्थान: मंत्रालय महानदी भवन, रायपुर
- दिनांक: 04 अगस्त 2026
- मुख्य फोकस: छत्तीसगढ़ सी.बी.जी. पॉलिसी 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन, कचरे एवं बायोगैस से संपीड़ित जैव गैस (CBG) का उत्पादन और निवेशकों को प्रोत्साहन।

रायपुर। 4 अगस्त
छत्तीसगढ़ राज्य में किफायती, पर्यावरण-अनुकूल और हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘सतत् विकल्प योजना’ (एस.ए.टी.ए.टी. – SATAT) के क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज ऊर्जा विभाग एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई।
बैठक में राज्य में कचरे, कृषि अवशेषों और बायोगैस से संपीड़ित जैव गैस (CBG) के वाणिज्यिक उत्पादन को मुख्य ईंधन के रूप में स्थापित करने पर व्यापक और दूरदर्शी चर्चा की गई। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सी.बी.जी. प्लांटों की स्थापना के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में रणनीतिक भूमि चिन्हित कर ली गई है और जरूरी मैदानी कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सी.बी.जी. पॉलिसी 2026 से खुलेगी प्रगति की नई राह
राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ सी.बी.जी. पॉलिसी 2026 को धरातल पर उतारा जा चुका है। इसके तहत राज्य शासन के विभिन्न विभागों (जैसे ऊर्जा, कृषि, पर्यावरण, नगरीय प्रशासन आदि) की स्पष्ट भूमिकाएं और जिम्मेदारियां तय की गई हैं, जिससे निवेशकों को पारदर्शी और सुगम प्रशासनिक प्रक्रिया मिल सके।
बैठक का मुख्य आकर्षण सी.बी.जी. प्लांट स्थापित करने वाले दूरदर्शी उद्यमियों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन पैकेजों पर विचार-विमर्श रहा।
क्या है SATAT योजना और इसके बेजोड़ फायदे?
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि किफायती परिवहन की दिशा में ‘सतत्’ (SATAT – Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है, जो अब छत्तीसगढ़ में भी पूरी ताकत से लागू है।
- सुनिश्चित बाजार और खरीद अनुबंध: योजना के अंतर्गत प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs व ONGC) जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) इन स्थानीय प्लांटों से उत्पादित सी.बी.जी. को सीधे खरीदने का गारंटीड अनुबंध करती हैं, जिससे निवेशकों को बाजार की कोई चिंता नहीं रहती।
- पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण से मुक्ति: खेतों की पराली, धान का पैरा और जैविक कचरे के सड़ने से फैलने वाले घातक वायु प्रदूषण पर प्रभावी लगाम लगेगी।
- अन्नदाताओं की आय में बंपर इजाफा: किसानों को उनके कृषि अवशेषों और पशु अपशिष्ट (गोबर आदि) के बदले अतिरिक्त और सुनिश्चित आय का जरिया मिलेगा।
- ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती: गांवों और कस्बों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए और विशाल अवसर सृजित होंगे।
इन प्रमुख नगरीय निकायों में सी.बी.जी. संयंत्रों की स्थापना तेजी पर
राज्य के कचरे के वैज्ञानिक एवं बेहतर प्रबंधन तथा सतत् ऊर्जा उत्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए प्रदेश के प्रमुख नगर निगमों और पालिकाओं में संयंत्र लगाने की कार्रवाई युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है। इनमें प्रमुख शहर शामिल हैं:
- भिलाई
- रायपुर
- बिलासपुर
- राजनांदगांव
- धमतरी
- कोरबा
- अंबिकापुर
- रायगढ़
बैठक में इन शीर्ष अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस उच्चस्तरीय बैठक में शासन के कई प्रमुख विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- श्री एस. प्रकाश (सचिव, परिवहन विभाग)
- श्री सारांश मित्तर (सचिव, ऊर्जा विभाग)
- श्री भीम सिंह (सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग)
इसके अलावा नगरीय प्रशासन एवं विकास, पशुधन विकास, पर्यावरण संरक्षण मंडल, कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण (CREDA), C&SIC तथा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
