छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण: श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर और स्वर्णिम भविष्य

रायपुर, 21 अगस्त 2026: राष्ट्र निर्माण की नींव में पसीना बहाने वाले श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना किसी भी विकसित राज्य की कल्पना अधूरी है। इसी दूरदर्शी सोच को मूर्त रूप देते हुए छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग प्रदेश के श्रमिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के कुशल मार्गदर्शन में पिछले ढाई वर्षों में श्रम विभाग ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे राज्य सरकार की श्रमिक-हितैषी और संवेदनशील कार्यशैली का जीता-जागता प्रमाण हैं।
1. प्रशासनिक सुगड़ता और सेवाओं का विकेंद्रीकरण
राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रम कानूनों का लाभ अंतिम पंक्ति के श्रमिक तक पहुंचे।
- कार्यालयों का विस्तार: प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए प्रदेश में 5 नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। साथ ही, 5 श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को उन्नत कर ‘सहायक श्रमायुक्त कार्यालय’ बनाया गया है।
- मजबूत नेटवर्क: अब छत्तीसगढ़ में कुल 33 श्रम कार्यालय (10 सहायक श्रमायुक्त और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय) संचालित हैं, जिससे श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है।
2. समय के अनुरूप श्रम कानूनों में ऐतिहासिक सुधार
बदलते दौर और औद्योगिक विकास के साथ संतुलन बनाते हुए श्रम कानूनों को आधुनिक और पारदर्शी बनाया गया है।
- महिलाओं के लिए रोजगार अवसर: छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर पर्याप्त सुरक्षा मानकों के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले गए हैं।
- इज ऑफ डूइंग बिजनेस: छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन कर श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र मात्र 24 घंटे के भीतर जारी करने का प्रावधान किया गया है, जिससे व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा मिला है।
3. सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक विस्तार
छत्तीसगढ़ में संगठित, निर्माण और असंगठित—तीनों वर्गां के श्रमिकों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है।
- 56 लाख से अधिक पंजीयन: विभिन्न मंडलों के माध्यम से अब तक 56.83 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।
- करोड़ों का व्यय: वर्ष 2026 में 30 जून तक लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य और शिक्षा का लाभ देने के लिए 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
- आर्थिक सहायता में बढ़ोतरी: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना’ के तहत घर बनाने के लिए मिलने वाली राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं ‘दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना’ के तहत महिला श्रमिकों को मिलने वाली सहायता राशि भी बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है।
4. शिक्षा, स्वास्थ्य और पौष्टिक भोजन की अनूठी पहल
- अटल कैरियर निर्माण योजना: पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी।
- अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना: कक्षा 6वीं से 12वीं तक के मेधावी बच्चों को उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। वर्ष 2026-27 से इस योजना के तहत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।
- स्वास्थ्य परीक्षण: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना’ से श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच कर शुरुआती स्तर पर बीमारियों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
- शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना: प्रदेश के 18 जिलों में संचालित 39 केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
5. डिजिटल क्रांति और मॉडल लेबर चौक
- ई-श्रम साथी मोबाइल ऐप: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिक घर बैठे पंजीयन, रोजगार की जानकारी और नियोजकों से सीधा संपर्क साध सकते हैं।
- मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर: इन केंद्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, आवेदन, विश्राम, पेयजल और भोजन की आधुनिक व्यवस्था की जा रही है, जिससे उन्हें पूरी गरिमा और सुरक्षा के साथ कार्यस्थल मिल सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार ने यह साबित कर दिया है कि श्रमिक केवल योजनाओं के हितग्राही नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति के मुख्य शिल्पकार हैं। प्रशासनिक सुदृढ़ता, वित्तीय सहायता, अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाएं और शिक्षा-स्वास्थ्य के बेहतरीन तालमेल से छत्तीसगढ़ आज देश में श्रमिक कल्याण का एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है।
विशेष टिप्पणी: श्रमिक सशक्तिकरण की इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए नजदीकी श्रम कार्यालय या ‘ई-श्रम साथी मोबाइल ऐप’ का उपयोग करें।
