विष्णु भैया के नेतृत्व में ‘महतारी गौरव वर्ष 2026’: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम अध्याय

रायपुर 21 अगस्त : किसी भी विकसित राज्य की वास्तविक पहचान केवल उसकी भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक स्वावलंबन और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी से तय होती है। जब आधी आबादी आत्मनिर्भर बनती है, तो पूरा परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को अपने सुशासन का मुख्य आधार बनाया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के यशस्वी नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मना रही है। इस विशेष वर्ष के तहत महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं, जो आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।
1. महतारी वंदन योजना: आर्थिक स्वतंत्रता का सबसे बड़ा संबल
राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी पहल ‘महतारी वंदन योजना’ आज छत्तीसगढ़ की महिलाओं की आर्थिक आजादी की रीढ़ बन चुकी है।
- विस्तार और आंकड़े: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को शुरू की गई इस योजना के तहत प्रदेश की 66 लाख से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि सीधे अंतरित की जा रही है।
- बजट प्रावधान: अब तक 30 किस्तों के माध्यम से 19,444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बांटी जा चुकी है। महिलाओं के इस वित्तीय संबल को और मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के वास्ते 8,200 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है।
2. भविष्य की सुरक्षा: रानी दुर्गावती और अन्य कल्याणकारी योजनाएं
बेटियों और महिलाओं के संपूर्ण जीवन चक्र को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सरकार ने कई नई और प्रभावी योजनाएं शुरू की हैं:
- रानी दुर्गावती योजना: बालिकाओं के उज्जवल भविष्य के लिए इस नई योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थित सहायता दी जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
- मातृत्व वंदना और वात्सल्य: प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
- सामूहिक विवाह और ऋण सहायता: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का विवाह कराया जा चुका है, जिसमें प्रत्येक जोड़े को 50,000 रुपये की सहायता मिलती है। इसके अलावा, महिला समृद्धि योजना के तहत 42,878 समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण और ‘महतारी शक्ति ऋण योजना’ के जरिए महिलाओं को बिना गारंटी 25,000 रुपये तक का स्वरोजगार ऋण मिल रहा है।
3. स्वास्थ्य, पोषण और महतारी सदन
महिलाओं और बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है:
- बजट आवंटन: वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये और कुपोषण मुक्ति योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है।
- महतारी सदन: महिलाओं को सामाजिक गतिविधियों, प्रशिक्षण और आजीविका से जोड़ने के लिए प्रदेश में महतारी सदन बनाए जा रहे हैं। अब तक 368 सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है (137 पूर्ण), और नए बजट में 250 नए सदनों के लिए 75 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
4. देश में अनूठी डिजिटल एसओपी और सखी वन-स्टॉप सेंटर
महिला सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने देश के सामने एक मिसाल पेश की है:
- सखी सेंटर: प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं। यहां पीड़ित या संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे कानूनी मदद, पुलिस सहायता, मेडिकल और काउंसलिंग की सुविधा मिल रही है।
- डिजिटल एसओपी: छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सखी सेंटर्स के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी (Standard Operating Procedure) लागू की है। महिला हेल्पलाइन 181 और 112 के जरिए आपातकालीन सहायता को और त्वरित बनाया गया है।
5. बिहान मिशन, लखपति दीदी और वैश्विक बाजार
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोले गए हैं:
- 10 लाख से अधिक लखपति दीदियां: बिहान मिशन के अंतर्गत 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों से 31.65 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए 10 लाख 43 हजार से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बना दिया है।
- यूनिटी मॉल और जशप्योर ब्रांड: महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार देने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड और सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें “वोकल फॉर लोकल” का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रही हैं।
6. श्रमिक महिलाओं और छात्राओं के लिए संबल
- श्रमिक योजनाएं: महिला निर्माण श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत 20,000 रुपये, सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता और मिनीमाता महतारी जतन योजना (गर्भवती महिलाओं के लिए 20,000 रुपये) जैसी योजनाएं वरदान साबित हो रही हैं।
- शिक्षा और स्वच्छता: उज्ज्वला योजना से 38 लाख महिलाएं लाभान्वित हैं। ‘सुशिक्षा योजना’ के तहत 2.18 लाख से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति और ‘शुचिता योजना’ के तहत 2,000 स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित कर किशोरियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जा रहा है।
निष्कर्ष: आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी फाइलों या योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन-जन का अभियान और एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन बन चुका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मजबूत नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रभावी मार्गदर्शन में प्रदेश की नारी शक्ति आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रही है। यह बदलता परिदृश्य स्पष्ट रूप से छत्तीसगढ़ को “सुशासन से समृद्धि” के पथ पर निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
