रायपुर 22 अगस्त : लंबे समय तक नक्सलवाद की मार झेल रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब भय और अशांति के बादल छंट चुके हैं। सुरक्षा बलों के पराक्रम और सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते बस्तर में शांति का नया सवेरा हुआ है, जिसके दम पर अब वहां विकास की रफ्तार को पंख लग गए हैं। यह बात मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में प्रेस सूचना कार्यालय (PIB) चेन्नई के निदेशक श्री पी. अरुण कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए चेन्नई के पत्रकारों के दल से सौजन्य मुलाकात के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डबल इंजन सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, और अब हमारा लक्ष्य बस्तर के कोने-कोने तक स्थायी समृद्धि और खुशहाली पहुंचाना है।
1. बस्तर में बदलाव: सुरक्षा के साथ चौतरफा विकास
- ऐतिहासिक परिवर्तन: मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग चार दशकों तक बस्तर को विकास की दौड़ में पीछे धकेलने वाले नक्सलवाद का अब खात्मा हो रहा है। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों ने दुर्गम इलाकों में विकास के रास्ते खोल दिए हैं।
- ‘नियद नेल्लानार’ योजना का कमाल: सुरक्षा कैंपों के आसपास बसे गांवों में इस योजना के जरिए सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, मोबाइल कनेक्टिविटी, और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं युद्ध स्तर पर पहुंचाई जा रही हैं।
- पर्यटन और उद्यमिता के नए द्वार: शांति स्थापना के साथ ही बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, जलप्रपातों और जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर उभारने की दिशा में काम हो रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
2. नई औद्योगिक नीति: निवेश और रोजगार का नया हब बन रहा छत्तीसगढ़
- औद्योगिक विकास नीति (2024-30): छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज और ऊर्जा तक सीमित नहीं है। राज्य की नई औद्योगिक नीति में स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
- भविष्य के उद्योग: एआई (AI), डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टरों में देश-विदेश के निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
- अनुकूल माहौल: रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, भरपूर बिजली और सरल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण छत्तीसगढ़ देश के सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्यों में शुमार होता जा रहा है।
3. शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी मोर्चे पर छलांग
- नवा रायपुर बना शिक्षा का केंद्र: राजधानी के आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों को उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म हो रही है।
- दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएं: मेडिकल शिक्षा के विस्तार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के जरिए सरकार की यह प्राथमिकता है कि विकास की रोशनी राज्य के अंतिम छोर पर बैठे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
सांस्कृतिक सौहार्द की अनूठी मिसाल
मुलाकात के अंत में छत्तीसगढ़ी आतिथ्य सत्कार की परंपरा निभाते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने चेन्नई के पत्रकारों को राज्य की शान प्रसिद्ध कोसा फैब की शॉल भेंटकर सम्मानित किया। वहीं, पत्रकारों के दल ने भी मुख्यमंत्री को तमिलनाडु की समृद्ध संस्कृति के प्रतीक महाबलीपुरम मंदिर की सुंदर प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में सौंपी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल और मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
समीक्षात्मक निष्कर्ष: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के इस संवाद ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ अब नक्सल प्रभावित राज्य की पुरानी छवि को पीछे छोड़कर ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन के साथ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
