परीक्षाओं की शुचिता से समझौता नहीं: IGKV प्रश्नपत्र लीक मामले पर सीएम विष्णु देव साय सख्त, 5 सदस्यीय जांच समिति गठित

रायपुर 22 अगस्त : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का मामला अब तूल पकड़ गया है। राज्य सरकार ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रमुख बिंदु और प्रशासनिक कार्रवाई
- जांच समिति का गठन: मुख्यमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।
- प्राथमिकी दर्ज (FIR): इस मामले में तेलीबांधा थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
- साइबर सेल की मदद: प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसार की तह तक जाने और इसके सोर्स का पता लगाने के लिए पुलिस के साइबर सेल की तकनीकी सहायता ली जा रही है।
- परीक्षा निरस्त: बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की 20 अगस्त को हुई परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। यह परीक्षा अब सितंबर के प्रथम सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेशभर के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 विद्यार्थी शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: “दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और पवित्रता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा:
“परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है। इस मामले की पूरी तह तक जाकर जांच की जाएगी। प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने इसे प्रसारित किया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही, प्रत्येक तथ्य सामने लाया जाएगा। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
भविष्य के लिए सुरक्षा चक्र को किया जा रहा मजबूत
सरकार ने केवल वर्तमान मामले में ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भेद-सुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया है कि:
- गोपनीयता की समीक्षा: प्रश्नपत्रों के निर्माण, रख-रखाव, और परीक्षा केंद्रों तक वितरण की पूरी प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की जाए।
- सुरक्षा के कड़े उपाय: परीक्षा प्रारंभ होने तक की हर एक कड़ी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
- लापरवाही पर एक्शन: जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
