बस्तर की नई पहचान: अब हिंसा नहीं, शांति, विकास और पर्यटन से गूंजेगी जलवाइयों की धरती

रायपुर | 23 अगस्त 2026 छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी देश भर में केवल नक्सलवाद और अशांति की सुर्खियों का पर्याय बना रहता था, अब इतिहास के एक नए और स्वर्णिम अध्याय की ओर कदम बढ़ा चुका है। चार दशकों की विभीषिका को पीछे छोड़कर बस्तर अब शांति, विश्वास, विकास और विश्वस्तरीय पर्यटन की एक ऐसी नई पहचान गढ़ रहा है, जो हर देशवासी को गर्व से भर दे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हाल ही में लेह-लद्दाख के अध्ययन भ्रमण से लौटे पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि अब समय आ गया है जब बस्तर की वास्तविक खूबसूरती, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अनछुए पर्यटन स्थलों से पूरी दुनिया को परिचित कराया जाए।
## बस्तर: प्रकृति और संस्कृति का अनुपम संगम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीय संवाद के दौरान कहा कि बस्तर प्रकृति की एक अत्यंत उदार और अनमोल देन है। यहां के सघन और रहस्यमयी वन, कल-कल करती नदियां, ऊंचे पहाड़, और रहस्यमयी गुफाएं पर्यटकों को अपनी ओर खींचने के लिए पर्याप्त हैं। इन सबके ऊपर, बस्तर की मूल पहचान उसकी विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराएं, पारंपरिक लोककला, हस्तशिल्प, अनूठा खान-पान और जीवनशैली है। हर गांव, हर डगर अपने भीतर संस्कृति और प्रकृति की एक अनकही दास्तान समेटे हुए है। आवश्यकता इस बात की है कि इन दुर्लभ धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जाए।
## चार दशकों का अंधेरा छंटा, विकास के खुले नए द्वार
पिछले करीब चालीस वर्षों से राष्ट्रीय मीडिया और मुख्यधारा की खबरों में बस्तर का नाम अमूमन हिंसक घटनाओं और नक्सलवाद के संदर्भ में ही लिया जाता रहा। इससे इस क्षेत्र की असली, सकारात्मक और खूबसूरत तस्वीर कहीं पीछे छिप गई थी। लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति तथा सुरक्षा बलों के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। क्षेत्र में अमन-चैन और शांति का स्थाई वातावरण स्थापित हो चुका है। बस्तर अब सड़क, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विस्तार के साथ विकास के पथ पर सरपट दौड़ रहा है।
## मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका: धारणा बदलने का समय
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बस्तर की इस बदलती हुई और खूबसूरत तस्वीर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से बस्तर के मनमोहक जलप्रपातों, प्राकृतिक सौंदर्य, लोक-संस्कृति और पर्यटन स्थलों की सकारात्मक और प्रेरणादायी कहानियां लोगों के सामने आएंगी, तो आम जनता के मन में बस्तर को लेकर बनी पुरानी नकारात्मक धारणा स्वतः बदल जाएगी। हम सबका यह साझा प्रयास होना चाहिए कि बस्तर को अब हिंसा या नक्सलवाद के लिए नहीं, बल्कि उसकी बेजोड़ प्रकृति, समृद्ध संस्कृति और विकासशील पर्यटन के लिए जाना जाए।
## पर्यटन का विस्तार: युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
पर्यटन केवल किसी क्षेत्र की पहचान को वैश्विक फलक पर स्थापित करने का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे बड़ा इंजन भी है। बस्तर में पर्यटन के व्यापक विस्तार से निम्नलिखित क्षेत्रों में भारी बूम आने की पूरी संभावना है:
- आतिथ्य सत्कार (होटल और होम-स्टे): पर्यटकों के ठहरने के लिए आधुनिक होटल और ग्रामीण परिवेश का अनुभव कराने वाले होम-स्टे की मांग बढ़ेगी।
- परिवहन और यात्रा सेवाएं: स्थानीय टैक्सी चालकों, टूर ऑपरेटरों और गाइड सेवाओं के लिए आय के नए स्रोत बनेंगे।
- हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद: बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा कला, टेराकोटा, काष्ठ शिल्प, और यहां के शुद्ध वनोपज को सीधे वैश्विक बाजार और अच्छे खरीदार मिल सकेंगे।
- स्वरोजगार: विशेष रूप से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के नए और सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे।
## लेह-लद्दाख मॉडल से प्रेरणा
लेह-लद्दाख के अध्ययन भ्रमण पर गए पत्रकारों ने वहां के पर्यटन प्रबंधन, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन और आजीविका के विभिन्न तौर-तरीकों का बारीकी से अध्ययन किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि लेह-लद्दाख की तरह ही बस्तर जैसी भौगोलिक और प्राकृतिक विशिष्टताओं वाले क्षेत्रों में यदि सुव्यवस्थित पर्यटन मॉडल लागू किया जाए, तो यह यहां के स्थानीय निवासियों की आर्थिक तकदीर पूरी तरह बदल सकता है।
राज्य सरकार बस्तर में शांति और विकास को स्थायी स्वरूप देने के साथ-साथ पर्यटन को हरसंभव बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का यह संकल्प है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बिना किसी भय के बस्तर आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट संस्कृति का आनंद लें और एक नए, जीवंत और बदलते बस्तर की मीठी यादों के साथ अपने घर लौटें।
इस महत्वपूर्ण सौजन्य मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित प्रदेश के कई प्रतिष्ठित और गणमान्य पत्रकार उपस्थित रहे।
विशेष नोट: “अब वक्त आ गया है कि बस्तर को बंदूक की गूंज से नहीं, बल्कि झरनों की कलकल और लोक-संस्कृति की थाप से पहचाना जाए।” — श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
