रायपुर रेल मंडल में सुरक्षा को बड़ा आयाम: बिलासपुर-दुर्ग सेक्शन में तेजी से हो रहा है सेफ्टी फेंसिंग का कार्य
असुरक्षित पटरियों पर लगाम, तेज और सुरक्षित रेल सफर की ओर रायपुर रेल मंडल का मजबूत कदम

रायपुर 29 अगस्त : रेल यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रायपुर रेल मंडल ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाया है। ट्रेन की पटरियों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और ट्रेनों की रफ्तार को सुरक्षित रूप से बढ़ाने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे सेफ्टी फेंसिंग (सुरक्षा घेराबंदी) का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
अत्यधिक व्यस्त माने जाने वाले बिलासपुर-दुर्ग सेक्शन में कुल 273 किलोमीटर के दायरे में सेफ्टी फेंसिंग का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 165.9 किलोमीटर का कार्य अब तक सफलताપूर्वक पूरा कर लिया गया है।
सेफ्टी फेंसिंग के प्रमुख लाभ एवं विशेषताएं
- अनधिकृत प्रवेश पर रोक: इसके माध्यम से पैदल यात्रियों और आम जनता को शॉर्टकट या अनजाने में रेलवे ट्रैक पर आने से पूरी तरह रोका जा रहा है।
- मवेशियों और वन्यजीवों की रोकथाम: ट्रैक पर अचानक मवेशियों और जंगली जानवरों के आ जाने से होने वाले हादसों और उनके कारण होने वाले नुकसान पर सीधा विराम लगेगा।
- ट्रेनों की बढ़ती रफ्तार के लिए कवच: पटरियों पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से दौड़ रही यात्री ट्रेनों के लिए यह फेंसिंग एक सुरक्षा कवच का काम कर रही है।
- परिचालन में बाधाओं से मुक्ति: दुर्घटनाओं और पशुओं के टकराने से ट्रेन संचालन में जो व्यवधान उत्पन्न होता था, उससे बड़ी राहत मिलेगी।
- रेल परिसंपत्तियों की सुरक्षा: हादसों के दौरान कोच, इंजन और अन्य रेलवे संपत्तियों को होने वाले भारी नुकसान के जोखिम को कम किया जा रहा है।
सुचारू, तेज और सुरक्षित रेल परिचालन का भविष्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पटरियों के दोनों ओर सेफ्टी फेंसिंग होने से एक सुरक्षित और नियंत्रित कॉरिडोर तैयार होता है। इससे न केवल वर्तमान में ट्रेनें अधिक सुरक्षित रूप से चल पा रही हैं, बल्कि भविष्य में ट्रेनों की गति को और अधिक बढ़ाने की योजनाओं को भी मजबूती मिल रही है। रायपुर रेल मंडल की यह पहल यात्रियों के सफर को और अधिक सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।
“यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सेफ्टी फेंसिंग का यह कार्य न केवल दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार है, बल्कि यह भविष्य के हाई-स्पीड रेल परिचालन के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।”
