दंतेवाड़ा / रायपुर, 4 अगस्त 2026 — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर आनंद और उनकी विशेष विशेषज्ञ टीम ने आज सुकमा-दंतेवाड़ा क्षेत्र के प्रमुख शिक्षा और नवाचार केंद्र—जिला विज्ञान केंद्र, दंतेवाड़ा का भव्य भ्रमण किया। इस दौरान इसरो वैज्ञानिकों ने केंद्र में चल रही वैज्ञानिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए हो रहे अनूठे प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

स्पेस गैलरी से लेकर ‘करके सीखें’ तक का अवलोकन
इसरो की उच्चस्तरीय टीम ने विज्ञान केंद्र की विभिन्न दीर्घाओं (गैलरी) का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित आकर्षणों का जायजा लिया:
- स्पेस गैलरी और फिजिक्स गैलरी: अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिकी के सिद्धांतों को सरल रूप में दर्शाते मॉडल्स की सराहना की।
- माइनिंग गैलरी: स्थानीय भौगोलिक और औद्योगिक महत्व को दर्शाती इस अनूठी गैलरी के प्रयासों को सराहा।
- ‘करके सीखें’ (Learning by Doing) गतिविधियां: विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल और प्रायोगिक ज्ञान बढ़ाने वाली पहलों को बेहद प्रभावी बताया।
सुदूर जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा का नया सवेरा
वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बस्तर जैसे सुदूर जनजातीय और आकांक्षी क्षेत्र में बच्चों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा जगाना एक सराहनीय कदम है। केंद्र प्रमुख उपेंद्र गौतम और उनकी समर्पित टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोफेसर आनंद ने कहा कि यह केंद्र बच्चों कोतात्विक और प्रायोगिक विज्ञान से जोड़ने का उत्कृष्ट माध्यम बन चुका है।
नवाचार और प्रेरणा का अनूठा संगम
इसरो टीम ने केंद्र द्वारा संचालित निम्नलिखित कार्यक्रमों को मील का पत्थर बताया:
- ‘कबाड़ से जुगाड़’ विज्ञान गतिविधियां: कम लागत में बेहतरीन वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने की कला।
- खगोल विज्ञान वृत्तचित्र (Documentaries): अंतरिक्ष रहस्यों पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन से विद्यार्थियों में अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति बढ़ रही रुचि।
इसरो वैज्ञानिकों के इस प्रेरणादायक दौरे से दंतेवाड़ा के विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। इस प्रकार की उच्च-स्तरीय सहभागिता निश्चित रूप से बस्तर अंचल के नौनिहालों को भविष्य में अंतरिक्ष वैज्ञानिक, शोधकर्ता और देश के अग्रणी नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रेरित करेगी।
