छत्तीसगढ़ में यूसीसी पर महा-मंथन: बस्तर से सरगुजा तक गूंजी आदिवासियों की आवाज, परंपराओं के संरक्षण के साथ कानून पर जोर

रायपुर 1 सितम्बर : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के सर्वसमावेशी प्रारूप को आकार देने की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक और तेज दौर में पहुंच गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित उच्चस्तरीय जन-संवाद कार्यक्रम में बस्तर के घोर वनों से लेकर सरगुजा की पहाड़ियों तक के प्रतिनिधियों ने अपनी पुरजोर उपस्थिति दर्ज कराई। राज्य में यूसीसी को लेकर सुलगती जिज्ञासाओं और उम्मीदों के बीच यह बैठक ऐतिहासिक साबित हुई, जहां आदिवासी संस्कृति, महिला अधिकार और राष्ट्रीय एकीकरण के बिंदुओं पर गंभीर और मैराथन मंथन हुआ।
दिग्गजों की मौजूदगी और बहुमूल्य सुझाव
यूसीसी समिति के समक्ष राज्य के प्रमुख आयोगों और संगठनों के शीर्ष नेतृत्व ने शिरकत की। समिति के सदस्य—सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े ने सभी पक्षों की दलीलें बेहद गंभीरता से सुनीं।
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे:
- सर्व आदिवासी समाज: अध्यक्ष व प्रतिनिधियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी राय रखी।
- राज्य महिला आयोग: अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों का पक्ष रखा।
- राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग: अध्यक्ष ने जनजातीय हितों की पैरवी की।
- राज्य फिल्म विकास निगम: अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने सांस्कृतिक धरोहर और महिला सशक्तिकरण पर बात रखी।
आदिवासी अस्मिता और रूढ़िगत प्रथाओं को मिले पूर्ण संरक्षण
चर्चा के दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग उठाई कि नए कानून के दायरे में उनकी सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, स्थानीय रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। प्रतिनिधियों ने साफ किया कि जनजातीय समाज की अपनी अनूठी परंपराएं हैं, जिन्हें राष्ट्रीय ढांचे में आत्मसात करते समय उनकी स्वायत्तता पर आंच नहीं आनी चाहिए। इसके अलावा विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक और व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुलकर मंथन किया।
महिला सुरक्षा, समानता और राष्ट्रीय एकता पर फोकस
महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बोलते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने दो टूक कहा कि जनजातीय परंपराओं का सम्मान होना ही चाहिए, साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव भी जरूरी हैं। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकारों को सुदृढ़ करने, राष्ट्रीय एकता को धार देने और धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की सख्त आवश्यकता को रेखांकित किया।
वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने की वकालत की। उन्होंने विश्वास जताया कि वैवाहिक और संपत्ति के अधिकारों में एकरूपता आने से समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को अभूतपूर्व कानूनी सुरक्षा और नया आत्मविश्वास मिलेगा।
जन-संवाद से तैयार होगा पारदर्शी और न्यायसंगत मॉडल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप यह समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद अभियान चला रही है। इस प्रस्तावित संहिता का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति या समुदाय के किसी भी भेदभाव से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के लिए एक समान और पारदर्शी विधिक ढांचा खड़ा करना है।
वर्तमान में यह समिति तीन मोर्चों पर काम कर रही है:
- जिला स्तरीय फील्ड स्टडी (जमीनी स्तर पर पड़ताल)
- ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आम जनता के सुझाव लेना
- प्रत्यक्ष बैठकें आयोजित कर कानूनविदों, प्रबुद्धजनों और सामाजिक संगठनों की राय जुटाना
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए यह समिति एक ऐसा जन-हितैषी और न्यायसंगत यूसीसी मॉडल तैयार करने की ओर अग्रसर है, जो देश के लिए एक मिसाल बन सके।
