रायपुर 2 अगस्त।
- कुल डिग्रियां प्रदान की गईं: 689 (जिसमें 376 महिलाएं और 313 पुरुष शामिल हैं)
- पुरस्कार एवं सम्मान: उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
- मुख्य अतिथि: उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन
- विशिष्ट अतिथि: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल।
- विशेष संकल्प: उपस्थित सभी नव-स्नातकों और अतिथियों द्वारा ‘नशे को ना कहें’ की सामूहिक शपथ ली गई।

1. अतीत के अंधकार से निकलकर प्रगति के नए शिखर पर छत्तीसगढ़
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक रूपांतरण की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
- नक्सलवाद का खात्मा: उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि राज्य के जिन दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में दशकों तक वामपंथी उग्रवाद, भय, हिंसा और आवागमन की लाचारी ने विकास को रोक रखा था, वहां आज मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बलबूते पर नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया गया है।
- बदली तस्वीर: उन्होंने रेखांकित किया कि जिन क्षेत्रों को पहले हिंसा के लिए जाना जाता था, आज वहां आधुनिक सड़कें, स्कूल, अस्पताल, मोबाइल कनेक्टिविटी और भारी निवेश आ रहे हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध प्रशासन को दिया।
2. एम्स रायपुर: मध्य भारत में चिकित्सा और स्वास्थ्य का गौरव
वर्ष 2012 में अपनी स्थापना के बाद से ही एम्स रायपुर ने मध्य भारत की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।
- बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं: उपराष्ट्रपति ने बताया कि एम्स रायपुर ने ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक तृतीयक (टर्शियरी) स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई हैं। छत्तीसगढ़ का पहला किडनी प्रत्यारोपण इसी संस्थान में हुआ, जिसकी सफलता दर 95% से अधिक है।
- आने वाले मील के पत्थर: संस्थान में कॉर्नियल (आंख) और कान प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं, और हाल ही में ‘हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम’ की मंजूरी मिलना छत्तीसगढ़ के मेडिकल इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
3. उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और ‘विकसित भारत 2047’
समारोह के दौरान देश के शैक्षणिक उत्थान और महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष प्रकाश डाला गया:
- महिला सशक्तिकरण के आंकड़े: उपराष्ट्रपति ने बताया कि देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2014-15 में जहां महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, वहीं वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 2.24 करोड़ (लगभग 42.2% की भारी वृद्धि) पहुंच गया है।
- विकसित भारत का विजन: युवा डॉक्टरों से आह्वान किया गया कि उनका ज्ञान समाज में स्वास्थ्य और नई उम्मीद लेकर आए। छत्तीसगढ़ का यह तीव्र रूपांतरण वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।
4. राज्यपाल और अन्य गणमान्य अतिथियों के प्रेरणादायक विचार
- राज्यपाल श्री रमेन डेका: समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल किताबी ज्ञान या तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धैर्य, करुणा और असीम जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। एक चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उसके संवेदनशील व्यवहार, आदर और विश्वास से तय होती है। उन्होंने छात्रों से वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान (Research) आधारित सोच अपनाने का आग्रह किया।
- केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल: उन्होंने आयुष्मान भारत (PM-JAY), ABHA और ई-संजीवनी जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए युवा डॉक्टरों से अपील की कि वे अपनी प्रैक्टिस में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (Preventive Healthcare), शोध और नैतिकता को सर्वोपरि रखें।
- कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त): उन्होंने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए चिकित्सा शिक्षा और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
5. दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण और समापन
समारोह का सबसे रोमांचक पल वह था जब विभिन्न चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले कुल 689 युवा चिकित्सकों को उनकी डिग्रियां सौंपी गईं। युवा चेहरों पर सफलता की चमक और अभिभावकों के चेहरों पर गर्व का भाव साफ झलक रहा था।
समारोह के अंत में सभी नव-स्नातक डॉक्टरों को यह शपथ दिलाई गई कि वे अपने पेशेवर जीवन में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ मानवता की सेवा करेंगे और समाज को स्वस्थ रखने के साथ-साथ ‘नशे को ना कहें’ के संदेश को घर-घर तक पहुँचाएंगे। यह दीक्षांत समारोह छत्तीसगढ़ के एक स्वस्थ, सुरक्षित और उन्नत भविष्य का सबसे बड़ा गवाह बना।
