छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में देश में नंबर-1 बना छत्तीसगढ़

रायपुर, 2 सितंबर 2026 — बारिश की हर बूंद को सहेजने और धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल को सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने एक अनूठा और प्रभावी जनभागीदारी मॉडल पेश किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश भर में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही, राज्य के पांच जिले भी देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल होकर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के इस जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने भी राज्य में वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जल संरक्षण को बनाया जनअभियान: मुख्यमंत्री श्री साय
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की इस बड़ी उपलब्धि को साझा करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं और कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे एक व्यापक जनअभियान का रूप दिया गया है।
स्वयं एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती की है, इसलिए वे ग्रामीण जीवन और खेती में पानी के महत्व को भली-भांति समझते हैं। किसान के लिए पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी आजीविका और भविष्य का आधार है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण योजनाओं के केंद्र में हमेशा से किसान और गांव को रखा गया है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले छत्तीसगढ़ का यह प्रदर्शन राज्य की सामूहिक चेतना का प्रमाण है।
कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना देश भर में मिसाल
मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए अभिनव ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष रूप से उल्लेख किया। इस अनूठी पहल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए दे रहे हैं।
इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं जिनसे खेत का पानी बाहर बहने के बजाय वहीं रुके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो जाए। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। पंचायतों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से जियो-टैगिंग और नियमित मॉनिटरिंग के जरिए इस मुहिम को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
अभियान के तीनों चरणों में शानदार छलांग
छत्तीसगढ़ ने ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के हर चरण में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है:
- प्रथम चरण (JSJB 1.0): राज्य में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं और छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।
- दूसरा चरण (JSJB 2.0): 24 लाख 7 हजार से अधिक संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 23 लाख से ज्यादा का कार्य पूर्ण हुआ। इस चरण में भी राज्य दूसरे स्थान पर रहा।
- तीसरा चरण (JSJB 3.0): छत्तीसगढ़ ने लंबी छलांग लगाते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया। इस चरण में 79,775 संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77,719 का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में शामिल
राज्य की इस ऐतिहासिक सफलता में जिलों का योगदान भी बेहद शानदार रहा है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिलों ने देश के शीर्ष 10 जिलों में अपनी पक्की जगह बनाई है। स्थानीय जरूरतों के हिसाब से जल संरचनाओं के निर्माण और जनसहयोग ने इन जिलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
इसके साथ ही, राज्य में सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है, और पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतार रहा छत्तीसगढ़
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन – जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मूल मंत्र को छत्तीसगढ़ ने अपनी भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रभावी ढंग से अपनाया है। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने देश के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए:
- हर राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अपना विशिष्ट ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे।
- उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ की शुरुआत की जाए।
- BISAG-N के माध्यम से मैपिंग को मजबूत किया जाए और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने पर प्रगति की समीक्षा हो।
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ का यह जनभागीदारी मॉडल आज पूरे देश के लिए जल सुरक्षा का एक नया और प्रेरणादायक मार्गदर्शक बन गया है।
