छत्तीसगढ़: माइनिंग से लेकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तक—नई औद्योगिक क्रांति की ओर बढ़ता राज्य

रायपुर 2 सितम्बर : छत्तीसगढ़ की पहचान अब तक देश के ऊर्जा आगार और खनिज बहुल राज्य के रूप में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में यह परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। राज्य सरकार ने कच्चे संसाधनों के निर्यात से आगे बढ़कर वैल्यू एडेड (मूल्य संवर्धन), हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन इंडस्ट्री को अपनी नई औद्योगिक धुरी बना लिया है।
औद्योगिक विकास नीति (2024-30) के विजन के साथ छत्तीसगढ़ अब केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि फिनिश्ड गुड्स (तैयार उत्पादों) और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का एक नया ग्लोबल हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
₹8 लाख करोड़ के रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव: बदलती आर्थिकी की तसवीर
नई औद्योगिक नीति और पारदर्शी प्रशासनिक सुधारों के चलते वैश्विक एवं राष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा छत्तीसगढ़ पर अटूट हुआ है।
- विशाल पूंजी प्रवाह: पिछले लगभग 18 महीनों में राज्य को करीब 8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
- रोजगार सृजन: इन प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से 1.5 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
- विविधीकरण: सबसे खास बात यह है कि यह निवेश केवल पारंपरिक माइनिंग और स्टील तक सीमित नहीं है, बल्कि एआई (AI), डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे आधुनिक सेक्टर्स में हो रहा है।

नवा रायपुर से राजनांदगांव तक: हाई-टेक क्लस्टर का उदय
राज्य के तकनीकी विकास को गति देने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
- नवा रायपुर का टेक कायाकल्प: एआई, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर सेक्टर में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो राज्य के डिजिटल भविष्य को मजबूत कर रहे हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0): राजनांदगांव में स्वीकृत इस आधुनिक क्लस्टर से 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश और लगभग 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
परंपरागत लोहा अब ‘ग्रीन स्टील’ के रूप में चमकेगा
स्टील उत्पादन के गढ़ छत्तीसगढ़ ने अब पर्यावरणीय स्थिरता की ओर बड़ा दांव खेला है। कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने और वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप ग्रीन स्टील के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।
- हाल ही में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग’ के दौरान 13,840 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आईं।
- केंद्र सरकार की पीएलआई (PLI) योजनाओं के साथ तालमेल बिठाकर राज्य अपने विशाल ऊर्जा आधार और खनिज संसाधनों का उपयोग उच्च मूल्य वाले स्पेशलिटी स्टील के निर्माण में कर रहा है।
फार्मा और क्षेत्रीय संतुलित विकास
- फार्मा सेक्टर में तेजी: पिछले 18 महीनों में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में लगभग 992.53 करोड़ रुपये के प्रस्ताव आए हैं, जिनमें से 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है।
- बस्तर और सरगुजा का समावेशी विकास: औद्योगिक विकास केवल शहरी सीमाओं तक सीमित नहीं है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक वनोपज, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय विशिष्ट संसाधनों को बढ़ावा देकर ग्रामीण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है।
निवेशक-अनुकूल नीतियां और सिंगल विंडो सिस्टम
निवेशकों के लिए राह आसान बनाने हेतु सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) और ऑनलाइन अप्रूवल मैकेनिज्म को बेहद पारदर्शी व त्वरित बनाया है। ₹100 करोड़ से अधिक के बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष प्राथमिकता और फास्ट-ट्रैक मंजूरियां दी जा रही हैं।
निष्कर्ष
खनिज, ऊर्जा और मजबूत बुनियादी ढांचे के दम पर छत्तीसगढ़ ने अपनी ऐतिहासिक ताकत को पहचान लिया है। अब इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर ग्रीन स्टील और फार्मा से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, छत्तीसगढ़ का यह नया औद्योगिक सफर देश की अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
