रायपुर, 4 अगस्त 2026 — छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में वनवासियों के अधिकारों को और अधिक मजबूत करने तथा उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में पेसा (PESA) और एफआरए (FRA) टास्क फोर्स समिति की उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न हुई।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर वनवासियों के साझा जल, जंगल और जमीन का प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जाएगा।
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्देश:
- पात्र हितग्राहियों को अधिकार पत्र: मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन अधिकार अधिनियम के नियमों के तहत सभी पात्र व्यक्तियों और समुदायों को प्राथमिकता से वन संसाधन अधिकार पत्र वितरित किए जाएं।
- संसाधनों का बेहतर प्रबंधन: राज्य के जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर विभागीय अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
- लंबित दावों की समीक्षा: बैठक के दौरान वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त दावों, आवेदनों की वर्तमान स्थिति तथा उनके निराकरण की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
- राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन: वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने (संपриिवर्तन) और सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण व प्रबंधन अधिकारों की मान्यता में हुई प्रगति का विस्तृत ब्योरा अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
- विभागीय प्रस्तुतियां: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ पेसा नियम के क्रियान्वयन और आदिम जाति विकास विभाग द्वारा वन निवासी अधिनियमों के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक में इन प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी:
इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ श्री अरुण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। इसके अलावा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलेक्टर और अन्य मैदानी अधिकारी भी बैठक से जुड़े रहे।
