छत्तीसगढ़ में शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय सम्मान समारोह: AI के दौर में तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी — राज्यपाल श्री रमेन डेका

रायपुर, 5 सितंबर 2026 — शिक्षक दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मण्डपम् में गरिमामय राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने समारोह में शिरकत करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रेरणादायी योगदान देने वाले प्रदेशभर के शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया और उन्हें अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर वक्ताओं ने विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा और गुरुओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया।

AI हमारा सहायक बने, नियंत्रक नहीं: राज्यपाल श्री रमेन डेका
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलती इस दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका का दायरा भी काफी व्यापक हो गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों का नई तकनीकों से परिचित होना बेहद आवश्यक है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी इस तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग करना है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि “AI हमारा सहायक बनना चाहिए, हमारा नियंत्रक नहीं।”

राज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के कारण हमारे पास सूचनाओं का विशाल भंडार उपलब्ध है, लेकिन तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारे स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है। दुनिया के कई देशों में बच्चों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक हमें केवल जानकारी दे सकती है, लेकिन सही संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा सिर्फ एक गुरु ही दे सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने इसे शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार बताया। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों की रुचि और उनकी विशेष प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय, करियर और जीवन की सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।
युक्तियुक्तकरण के बाद अब प्रदेश में एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई दी और राज्य स्तरीय सम्मान पाने वाले सभी शिक्षकों को गौरवशाली उपलब्धि के लिए नमन किया। उन्होंने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा हमेशा से दुनिया में गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी पाना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण की सफल प्रक्रिया के बाद अब छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं बचा है।
स्थानीय और दूरस्थ अंचलों में शिक्षा के विस्तार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से पढ़ाने की अभिनव पहल शुरू की गई है, जिससे बच्चों के लिए सीखना बेहद आसान हो गया है। साथ ही, बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में ‘एजुकेशन सिटी’ विकसित की जा रही है। प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन ‘पीएम श्री योजना’ के अंतर्गत किया गया है, और महान संत स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 नए उत्कृष्ट विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण का लक्ष्य है, जिसे पूरा करने में हमारे शिक्षकों का योगदान सबसे अहम होगा।
शिक्षा में नवाचार और स्मार्ट स्कूलों को बढ़ावा: स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव
समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और नवाचारों को तेजी से बढ़ावा दे रही है। प्रदेश भर में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा भी की और सभी को बधाई दी।
इन चार प्रबुद्ध शिक्षकों को मिला प्रतिष्ठित ‘राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार’
समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित चार विशिष्ट स्मृति पुरस्कारों से उत्कृष्ट शिक्षकों को नवाजा गया:
- श्री राजेश कुमार प्रजापति (जिला – खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) — डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार
- श्री कामता प्रसाद जायसवाल (जिला – कोरबा) — डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार
- श्रीमती प्रज्ञा सिंह (जिला – दुर्ग) — डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार
- श्रीमती प्रियंका गोस्वामी (जिला – सारंगढ़-बिलाईगढ़) — श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार
इसके अतिरिक्त, प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को महामहिम राज्यपाल के हाथों ‘राज्यपाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने दिया, जबकि आभार प्रदर्शन संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्री संतोष देवांगन सहित तमाम वरिष्ठ विभागीय अधिकारी, दूर-दराज के जिलों से पधारे सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
