शिक्षा विकास का मूलमंत्र: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़-पश्चिम बंगाल में ‘शिक्षा क्रांति’ का नया शंखनाद

- रायपुर में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह (अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना) के मंच से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का बड़ा और दूरगामी संदेश
- बोले साय- “शिक्षा ही वह बुनियादी ताकत है जिससे बदलेगी देश और राज्य की तस्वीर; इसके बिना उज्ज्वल भविष्य की कल्पना असंभव”
- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी के शैक्षणिक सुधारों की खुलकर की तारीफ, दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस साझा संकल्प से देश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल
विशेष संवाददाता
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के नव-निर्माण का मूलमंत्र घोषित करते हुए देश के शैक्षणिक पटल पर एक नई बहस और बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर दिया है。 रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह (अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना) में मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने, बुनियादी ढांचे को बदलने और भावी पीढ़ी को वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए लगातार बेहद कड़े, पारदर्शी और दूरगामी कदम उठा रही है।
इसी ऐतिहासिक मंच से मुख्यमंत्री साय ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण राजनैतिक-प्रशासनिक संदेश देते हुए पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी के प्रयासों की भी मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी जी भी शिक्षा के आधुनिकीकरण और राष्ट्रवाद से प्रेरित शैक्षणिक ढांचे के विकास के लिए उत्कृष्ट और उचित कदम उठा रहे हैं। देश के दो बड़े और दूरदर्शी मुख्यमंत्रियों के शिक्षा के प्रति इस साझा और सहयोगात्मक दृष्टिकोण ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
“गुणवत्ता और आधुनिकता से समझौता नहीं” – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षा महज़ साक्षरता का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे सुनहरे कल की तैयारी है। हमारी सुशासन सरकार का यह अटल संकल्प है कि बस्तर और सरगुजा के अंतिम छोर पर बैठे आदिवासी अंचल के बच्चे से लेकर शहरों के विद्यार्थियों तक, सभी को समान और विश्वस्तरीय शिक्षा मिले।” उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों के उन्नयन (अपग्रेडेशन), डिजिटल क्लासरूम्स, अत्याधुनिक स्पेस लैब्स की स्थापना और नई तकनीकों के समावेश के साथ छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली को ‘फ्यूचर बेस्ड एजुकेशन’ (भविष्यन्मुखी शिक्षा) का मॉडल बनाया जा रहा है।
दो राज्यों की जुगलबंदी: शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत
मुख्य पृष्ठ के विश्लेषण के अनुसार, मुख्यमंत्री साय द्वारा बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के प्रयासों की सराहना करना केवल एक सामान्य बयान नहीं है, बल्कि देश में चल रहे बड़े शैक्षणिक रिफॉर्म्स (सुधारों) का संकेत है। जहां एक तरफ छत्तीसगढ़ में ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ और प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय बोलियों (18 बोलियों) को शामिल कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को धरातल पर उतारा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी शिक्षा विभागों के एकीकरण, पारदर्शिता और राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत विद्या भारती के 1,000 नए स्कूलों के निर्माण जैसे अभूतपूर्व कदम उठा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन की शिक्षा’: मुख्य स्तंभ
- फ्यूचर बेस्ड एजुकेशन मॉडल: स्कूलों को अत्याधुनिक स्पेस लैब्स, तकनीक और डिजिटल संसाधनों से जोड़कर बच्चों को वैज्ञानिक और प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए तैयार करना।
- सशक्त बुनियादी ढांचा और सुरक्षा: बस्तर और पूर्ववर्ती वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोलना और वहां उच्च स्तरीय ‘एजुकेशन सिटी’ का विकास करना।
- स्थानीय भाषाओं को सम्मान: आदिवासी अंचलों में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए स्थानीय बोलियों में द्विभाषी पुस्तकों का निर्माण।
- उच्च शिक्षा और विदेश पढ़ाई में मदद: श्रमिकों और जरूरतमंद बच्चों को विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए ऋण और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
मुख्यमंत्री के इस दमदार बयान और दोनों राज्यों के साझा विजन से यह साफ है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों के रूप में उभरेंगे。
💡 CM साय:
“शिक्षा ही वह बुनियादी ताकत है जिससे किसी भी राज्य या देश का विकास संभव है। हमारी सरकार हर स्तर पर उचित कदम उठाकर छत्तीसगढ़ के बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही है।”
📊 बड़ा राजनैतिक संदेश:
मुख्यमंत्री साय द्वारा बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शिक्षा मॉडल की तारीफ करना, राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा शासित दोनों राज्यों की नीतियों के आपसी समन्वय और ‘सुशासन के एजेंडे’ को मजबूती से पेश करता है।
