राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित छत्तीसगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव: नवाचार, तकनीक और संवेदना से गढ़ा राष्ट्रीय इतिहास

रायपुर, 6 सितंबर 2026 — शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर ऐतिहासिक गौरव हासिल किया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की कर्मठ और सृजनशील शिक्षिका श्रीमती सुनीता यादव को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत किया गया।
इस गौरवशाली वर्ष में छत्तीसगढ़ से इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान को प्राप्त करने वाली वे इकलौती शिक्षिका हैं, जिनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि ने पूरे प्रदेश और विशेषकर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया है।
सांकरा से विज्ञान भवन तक: प्रेरणास्पद जीवन यात्रा
महासमुंद जिले के सांकरा में एक सम्मानित शिक्षक परिवार में जन्मीं सुनीता यादव छात्र जीवन से ही अत्यंत मेधावी और अध्ययनशील रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में ही संपन्न हुई। इसके बाद उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षा के क्षेत्र में अपने करियर को आधार देने के लिए उन्होंने पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर से बी.एड. की उपाधि अर्जित की और अध्यापन को अपना मुख्य कर्मक्षेत्र चुना। बरमकेला के व्यवसायी श्री नंदकुमार यादव से विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा के प्रति अपनी लगन, सक्रियता और रचनात्मकता को कभी कम नहीं होने दिया। उनकी पुत्री सृजना यादव वर्तमान में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने की यह यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने कार्यों से समाज में बदलाव लाना चाहता है।
नवाचार, तकनीक और संवेदना का अनूठा संगम
सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा को केवलता पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर, श्रीमती सुनीता यादव ने इसे साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों का जीवंत मंच बना दिया है:
- खेल-खेल में शिक्षा: कक्षाओं के अंतिम पायदान पर खड़े और पिछड़ रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किए। बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने के लिए उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा तथा आधुनिक नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया।
- सिनेमाई और डिजिटल शिक्षण: कठिन विषयों को बेहद सहज और रोचक ढंग से समझाने के लिए वे स्वयं और अपने विद्यार्थियों के अभिनय से लघु फिल्मों (Short Films) का निर्माण करती हैं और उनका उपयोग शिक्षण में करती हैं।
- आधुनिक तकनीकी माध्यम: दीक्षा ऐप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग कर उन्होंने बच्चों के सीखने के अनुभव को अत्यंत प्रभावी और मनोरंजक बना दिया है। उनके इन प्रयासों में शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने की अनूठी पहल भी शामिल है।
शिक्षा से परे सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएं
शिक्षिका सुनीता यादव का सरोकार केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं:
- पोषण और न्योता भोजन: विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण को सर्वोपरि रखते हुए वे अपने निजी व्यय से बच्चों को नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराती हैं तथा समाज को अधिक से अधिक ‘न्योता भोजन’ कराने के लिए लगातार प्रेरित करती हैं।
- निःशुल्क समर कैंप: शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक अपनी पहुँच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए विशेष निःशुल्क समर कैंप संचालित कर अध्यापन कार्य किया।
- पर्यावरण और राष्ट्रप्रेम: विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने के लिए उन्होंने प्रकृति संरक्षण हेतु ‘सीड बॉल’ तैयार करने और देश की सरहद पर सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी निर्माण जैसे सराहनीय कार्य किए हैं। वे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावों पर शोध पत्र तैयार करने वाली पहली महिला शिक्षिका भी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संवाद और राष्ट्रीय सराहना
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से ठीक एक दिन पूर्व, देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित देश भर के चुनिंदा शिक्षकों को अपने आधिकारिक आवास पर आमंत्रित किया और उन्हें बधाई दी।
इस विशेष अवसर पर शिक्षिका सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने शिक्षण कार्यों, नवाचारों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत विवरण साझा किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उनके नियमित अध्यापन कार्य के साथ-साथ शिक्षा में नवाचार, तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के उपयोग की मुक्तकंठ से सराहना की। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे से विद्यालय में बच्चों के लिए लघु फिल्मों के माध्यम से शिक्षण, ऑडियो बुक और पॉडकास्ट के प्रयोग तथा स्मार्ट क्लास के संचालन जैसे अनूठे प्रयासों ने उनके विद्यालय को पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बना दिया है।
जिला प्रशासन और शासन स्तर पर अभिनंदन
शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक श्री सुनील शर्मा ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
अधिकारियों और मंत्रियों ने अपने संदेश में कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने का उनका यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। एक जिले की शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उनके ये नवाचारपूर्ण कार्य प्रदेश के अन्य शिक्षकों को भी नई सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।
निष्कर्ष: राष्ट्रपति के कर-कमलों द्वारा प्राप्त यह राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान वास्तव में सुनीता यादव की उस लंबी और संघर्षशील यात्रा की राष्ट्रीय मान्यता है, जिसमें उन्होंने एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय की कक्षा को नवाचार, साहित्य, तकनीक और संवेदना का एक जीवंत मंच बना दिया है।
