सुकमा की माटी में प्रशासन की नई मिसाल: बाइक पर सवार होकर मेटागुड़ा पहुंचे कलेक्टर-सीईओ, पलक झपकते ही पूरी हुईं ग्रामीणों की मांगें

रायपुर, 06 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के ‘सुशासन, पारदर्शिता और जनता के द्वार प्रशासन’ के मूल मंत्र को सुकमा जिले के प्रशासनिक अमले ने धरातल पर चरितार्थ कर दिखाया है। नक्सल प्रभावित और प्रशासनिक पहुंच से दूर माने जाने वाले मेटागुड़ा गांव में जो हुआ, वह छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल बन गया है। जिला मुख्यालय से कोसों दूर इस गांव के ग्रामीणों की सुधि लेने के लिए इस बार कोई वीआईपी काफिला नहीं, बल्कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ खुद बाइक चलाकर कच्ची-पक्की सड़कों से होते हुए सीधे ग्रामीणों के बीच जा पहुंचे।
ट्रैक्टर का सफर और महज 48 घंटे के भीतर एक्शन में आया प्रशासन
इस पूरी प्रशासनिक संवेदनशीलता की शुरुआत दो दिन पहले हुई थी। जब मेटागुड़ा गांव के ग्रामीण अपनी प्राथमिक आवश्यकताओं—विशेषकर बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल और आंगनबाड़ी भवन जैसी मूलभूत मांगों को लेकर ट्रैक्टर पर सवार होकर सुकमा जिला मुख्यालय पहुंचे थे।
आमतौर पर ऐसी दूरदराज की मांगों को फाइलों के लाल फीताशाही में उलझने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार ने गजब की तत्परता दिखाई। ग्रामीणों की पीड़ा को गंभीरता से समझते हुए उन्होंने महज दो दिनों के भीतर खुद जमीनी हकीकत देखने का निर्णय लिया। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर ने किस्ताराम से करीब 20 किलोमीटर आगे का दुर्गम सफर बाइक से तय किया और सीधे मेटागुड़ा पहुंच गए।
पेड़ की छांव: ज़मीन पर बैठकर सुनी जनता की पीड़ा, मौके पर मिले स्वीकृति आदेश
मेटागुड़ा पहुंचते ही प्रशासनिक मुखियाओं ने किसी वीआईपी प्रोटोकॉल की परवाह नहीं की। गांव के एक पेड़ के नीचे चारपाई और कुर्सियों के बजाय सीधे ज़मीन पर बैठकर उन्होंने चौपाल लगाई। ग्रामीणों को अपने बीच पाकर और खुद मुखिया को ज़मीन पर बैठा देख ग्रामीणों का हिचक और संकोच दूर हो गया। उन्होंने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं।
कलेक्टर ने मौके पर ही संज्ञान लेते हुए त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की और:
- मेटागुड़ा में आधुनिक आंगनबाड़ी भवन के निर्माण को तत्काल स्वीकृति दी।
- आमापेंटा में प्राथमिक शाला भवन के निर्माण का आदेश भी मौके पर ही जारी कर दिया।
सिंचाई, रोजगार, बिजली और सड़क: विकास की चारो दिशाओं में काम शुरू
चौपाल के दौरान केवल भवन ही नहीं, बल्कि गांव के संपूर्ण विकास का खाका खींचा गया:
- कृषि और रोजगार: किसानों की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए गांव में नहर विकास कार्यों और ‘वीबी-जी रामजी’ योजना के तहत नए तालाब निर्माण को स्वीकृति दी गई। इससे एक ओर जहां खेतों को पानी मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
- रोशनी और रास्ते: विद्युतीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आगामी दो माह के भीतर मेटागुड़ा को बिजली से रोशन करने का ठोस आश्वासन दिया गया है। वहीं, क्षेत्र में पक्की सड़क के निर्माण के लिए विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) पहले ही तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है।
सोमवार को मेटागुड़ा में लगेगा विशेष शासकीय शिविर
ग्रामीणों को अब अपने छोटे-छोटे कामों और दस्तावेजों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रशासन ने घोषणा की है कि आगामी सोमवार को मेटागुड़ा गांव में ही एक विशेष शिविर लगाया जाएगा। इस शिविर के माध्यम से मौके पर ही:
- वोटर आईडी और राशन कार्ड बनवाने,
- [Aadhaar Redacted] कार्ड से जुड़ी त्रुटियों को सुधारने,
- और श्रम कार्ड व आयुष्मान कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
गदगद हुए ग्रामीण, बयां की खुशी
अपनी समस्याओं का इतनी जल्दी, इस प्रकार घर-आंगन में समाधान होते देख मेटागुड़ा के ग्रामीणों की आँखें नम और चेहरे खुशी से खिल उठे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार किसी कलेक्टर को इस तरह बाइक से गांव आते और ज़मीन पर बैठकर उनकी बात सुनते देखा है।
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता और जनहित की भावना के साथ कार्य करता है, तो सरकार और जनता के बीच की दूरी शून्य हो जाती है। यह सुकमा के विकास इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
