रायपुर 6 सितम्बर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत और कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ाते हुए उसकी तुलना अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से कर दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की कुख्यात ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर काम कर रही है। देश की जनता को जोड़ने का नाटक करने वाली कांग्रेस का असली चरित्र केवल और केवल गुटबाजी और कलह पैदा करना है, जिसके कारण आज पूरी पार्टी बिखर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया संगठनात्मक प्रभार में हुए बदलावों का सीधा हवाला देते हुए कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब प्रभारी के रूप में भूपेश बघेल का वहां के स्थानीय नेताओं द्वारा भारी विरोध किया गया था, और इसी फजीहत से बचने के लिए पार्टी को उनका प्रभार बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
जहां भी जाती है कांग्रेस, वहां खड़ी करती है गुटबाजी की दीवार: साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी और प्रादेशिक चरित्र पर गहरा प्रहार करते हुए कहा, “कांग्रेस का इतिहास और वर्तमान गवाह है कि विकास या जनहित से उनका कोई सरोकार नहीं रह गया है। यह पार्टी पूरी तरह से अंग्रेजों के पदचिह्नों पर चल रही है। कांग्रेस के नेता जहां भी जाते हैं, वहां संगठन को मजबूत करने के बजाय कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच मतभेद पैदा करते हैं। गुटबाजी को हवा देना और आपस में लड़वाना ही इस पार्टी की मूल कार्यशैली बन चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा कि जो पार्टी अपने ही नेताओं को एक मंच पर नहीं रख सकती, वह देश या राज्य का भला क्या करेगी। कांग्रेस का यही अंतर्विरोध आज उसे देश के राजनीतिक मानचित्र से गायब कर रहा है।
भूपेश बघेल के पंजाब प्रभार पर सीधा निशाना: ‘भारी विरोध का नतीजा’
कांग्रेस के भीतर मचे सांगठनिक घमासान को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने बघेल के पंजाब दौरे और वहां की सांगठनिक कमान को लेकर बड़ा दावा किया। सीएम साय ने कहा, “भूपेश बघेल जी जब पंजाब के प्रभारी बनाकर भेजे गए थे, तो वहां के वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं ने उनके काम करने के तौर-तरीकों और हस्तक्षेप का खुलकर विरोध किया था। पंजाब कांग्रेस में जिस तरह की सिरफुटौवल और अंतर्कलह मची, वह देश के सामने है।”
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए आगे कहा, “पंजाब में बघेल जी के खिलाफ उपजे इसी भारी आक्रोश और असंतोष का नतीजा है कि आज कांग्रेस आलाकमान को बैकफुट पर आना पड़ा। अपनी साख बचाने के लिए कांग्रेस ने आनन-फानन में उनका प्रभार प्रदेश बदल दिया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस नेतृत्व भी यह स्वीकार कर चुका है कि उनके बड़े नेता राज्यों में सिर्फ विवाद खड़ा करने का काम कर रहे हैं।”
बदलते सियासी समीकरणों के बीच साय का ‘मास्टरस्ट्रोक’
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह बयान बेहद आक्रामक, दमदार और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ कांग्रेस राज्य के स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के फैसलों और उनके सबसे बड़े प्रादेशिक चेहरे की संगठनात्मक विफलता को उजागर करके मुख्य विमर्श को ही बदल दिया है।
मुख्यमंत्री साय के इस चौतरफा हमले ने छत्तीसगढ़ से लेकर पंजाब तक की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस बयान के बाद कांग्रेस पूरी तरह से रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है, और प्रदेश की राजनीति में सांगठनिक क्षमता और गुटबाजी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
