झीरम घाटी नरसंहार: 13 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला, सभी 10 आरोपी दोषी करार; 16 सितंबर को अदालत सुनाएगी सजा
तत्कालीन यूपीए सरकार ने सौंपी थी एनआईए को जांच, 100 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद विशेष अदालत ने मुहर लगाई: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर / जगदलपुर6 सितम्बर । छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे खौफनाक और वीभत्स नक्सली हमले ‘झीरम घाटी हत्याकांड’ (2013) में आखिरकार 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एनआईए की विशेष अदालत (NIA Special Court) ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायालय के न्यायाधीश ने मामले से जुड़े सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस बड़े फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सूबे के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि लंबे समय तक चली इस वैधानिक प्रक्रिया और पुख्ता सबूतों के आधार पर न्याय की जीत हुई है। दोषियों को क्या सजा दी जाएगी, इसका निर्धारण आगामी 16 तारीख (16 सितंबर) को एनआईए की विशेष अदालत करेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा- लंबी सुनवाई और ठोस पैरवी से मिला न्याय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फैसले का स्वागत करते हुए मामले की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, “जिस समय यह दर्दनाक घटना घटित हुई थी, उस समय केंद्र में यूपीए (UPA) की सरकार थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनआईए को यह केस जांच के लिए सौंपा गया था। एनआईए ने लगातार 13 वर्षों तक इस केस में सघन और निष्पक्ष सुनवाई की है। इस दौरान 100 से ज्यादा गवाहों से गवाही ली गई और उनके बयानों को बारीकी से परखा गया। इसी कड़े कानूनी प्रयास का परिणाम है कि आज सभी 10 आरोपी दोषी ठहराए गए हैं।” उन्होंने भरोसा जताया कि 16 तारीख को आने वाला सजा का फैसला पीड़ितों के परिवारों के जख्मों पर कुछ हद तक मरहम लगाने का काम करेगा।
क्या था झीरम घाटी हत्याकांड? (ऐतिहासिक संदर्भ)
यह खूनी मंजर 25 मई 2013 को बस्तर संभाग के दरभा की झीरम घाटी में सामने आया था। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस पार्टी द्वारा निकाली जा रही ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर घात लगाए बैठे सैकड़ों माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग और बारूदी विस्फोट कर दिया था। इस आत्मघाती नक्सल हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, बस्तर के कद्दावर नेता महेंद्र कर्मा, और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हमले ने छत्तीसगढ़ के पूरे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को खत्म कर दिया था, जिसे सुरक्षा बल देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक मानते हैं।
इन 10 आरोपियों पर तय हुए थे गंभीर आरोप
एनआईए कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम ज्योति, चैतू लेकाम, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मडकम, मड़कमी देवा, जोगा मड़कमी, बंजामी सना और महादेव शामिल हैं। इन सभी पर वारदात को अंजाम देने के लिए नक्सली साजिश रचने, हथियार लूटने, जानलेवा विस्फोटकों का इस्तेमाल करने और हमलावरों को रसद व कूटनीतिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे देशद्रोह के गंभीर आरोप कोर्ट में सिद्ध हुए हैं। अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को यह बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाकर बस्तर में न्याय की नई नजीर पेश की है।
