झीरम घाटी मामले पर सियासत तेज: सीएम विष्णुदेव साय का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले– “जब जेब में सबूत थे, तो जांच एजेंसी को क्यों नहीं सौंपे?”

- न्यायालयीन प्रक्रिया पर सवाल क्यों? एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस की बयानबाजी पर सीएम साय का तीखा पलटवार।
- यूपीए सरकार के कार्यकाल में सौंपी गई थी जांच: सीएम ने याद दिलाया कि जब यह मामला एनआईए को दिया गया था, तब केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी।
- भूपेश बघेल पर सीधा तंज: विपक्ष में रहते हुए ‘जेब में सबूत होने’ का दावा करने वाले नेता अब जनता को जवाब दें।
- अंग्रेजों की नीति पर चल रही कांग्रेस: प्रभारियों के फेरबदल और आंतरिक कलह पर मुख्यमंत्री का करारा कटाक्ष।
रायपुर 6 सितम्बर : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार का मामला गरमा गया है। एनआईए (NIA) न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से लगातार दिए जा रहे बयानों पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी करने से न तो इतिहास बदला जा सकता है और न ही दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली न्यायिक प्रक्रिया को झुठलाया जा सकता है।
13 साल की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और 100 से अधिक गवाहों की गवाही
मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तथ्यात्मक बातें सामने रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि झीरम प्रकरण की जांच किसी राज्य पुलिस या स्थानीय एजेंसी ने नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी और निष्पक्ष जांच एजेंसी एनआईए ने की थी।
यह जांच उस समय सौंपी गई थी जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार सत्ता में थी। लगभग 13 वर्षों तक इस मामले की गहन जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली, जिसमें 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। तमाम साक्ष्यों और तथ्यों के वैज्ञानिक व कानूनी परीक्षण के बाद ही न्यायालय का यह निर्णय सामने आया है, जिसमें 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है। आगामी 16 सितंबर को इन दोषियों की सजा का निर्धारण किया जाएगा। ऐसे में न्यायालय के निर्णय पर सवाल खड़े करना न्यायपालिका का अपमान है।
“पूर्व सीएम भूपेश बघेल जवाब दें, सबूत कहां दबा रखे थे?”
मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल पर सीधा और तीखा निशाना साधा। उन्होंने पुराना वाकया याद दिलाते हुए कहा कि जब श्री बघेल विपक्ष में हुआ करते थे, तब वे मीडिया और सार्वजनिक मंचों से बड़े-बड़े दावे करते थे कि “झीरम के सारे सबूत उनकी जेब में हैं।”
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में सवाल किया:
“यदि वाकई आपके पास झीरम से जुड़ा कोई ठोस सबूत, दस्तावेज या प्रमाण था, तो आपने उसे जांच एजेंसी एनआईए को क्यों नहीं सौंपा? आपके पास पर्याप्त समय था, सत्ता में रहते हुए भी आप कार्रवाई कर सकते थे। सिर्फ हवा में तीर चलाना और राजनीतिक रोटियां सेकना आसान होता है, लेकिन जब अदालत में साबित करने की बारी आती है, तो सबूत गायब हो जाते हैं। न्यायिक प्रक्रिया बयानों से नहीं, ठोस साक्ष्यों से चलती है।”
कांग्रेस की राजनीति का चरित्र: ‘फूट डालो और राज करो’
कांग्रेस पार्टी में हाल ही में हुए संगठन प्रभारियों के फेरबदल और आंतरिक घमासान पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की पुरानी नीति ‘फूट डालो और राज करो’ पर चल रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जहां भी जाती है, वहां आपसी कलह, गुटबाजी और खींचतान का दौर शुरू हो जाता है। जनता के मूल मुद्दों और विकास के कार्यों पर ध्यान देने के बजाय कांग्रेस के बड़े नेता अपने ही दल के भीतर एक-दूसरे की टांग खींचने में व्यस्त रहते हैं।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के सांगठनिक प्रभार में हुए बदलाव पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी पार्टी के भीतर भारी विरोध के स्वर उठे थे। शायद उसी का परिणाम है कि अब उनका प्रदेश प्रभार बदल दिया गया है। यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला हो सकता है, लेकिन जिस प्रकार उनके नेताओं के बीच आपसी विरोध सार्वजनिक होता है, उससे कांग्रेस की खोखली कार्यसंस्कृति पूरी तरह बेनकाब हो जाती है।
जनता सब जानती है, भ्रम की राजनीति नहीं चलेगी
मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। एक तरफ उनके नेता अदालत के फैसलों पर अनाप-शनाप बयानबाजी करते हैं, और दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी को संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कोरे भ्रम की राजनीति को भली-भांति समझती है। राज्य की जनता को बयानबाजी नहीं, बल्कि सच्चाई, पारदर्शिता और विकास चाहिए।
