छत्तीसगढ़ी माटी की महक और लोक संस्कृति का महाकुंभ: राजधानी में भव्यता के साथ मनाया गया तीजा-पोरा तिहार

- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीर नगर में मोर माटी सांस्कृतिक संगठन के कार्यक्रम में की शिरकत
- सर्व समाज भवन के लिए 50 लाख रुपए देने की बड़ी घोषणा, मेधावी बच्चों और माताओं-बहनों का हुआ सम्मान
- तीजा-पोरा तिहार हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और कृषि परंपरा के जीवंत प्रतीक: मुख्यमंत्री साय

रायपुर, 07 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आत्मीय पारिवारिक परंपराओं और अन्नदाताओं के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक पारंपरिक लोकपर्व ‘तीजा-पोरा तिहार’ इस वर्ष राजधानी रायपुर में अभूतपूर्व उत्साह, उमंग और भव्यता के साथ मनाया गया। राजधानी के कबीर नगर स्थित दशहरा मैदान में ‘मोर माटी सांस्कृतिक संगठन’ के तत्वावधान में आयोजित इस विशाल सांस्कृतिक समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कबीर नगर में सर्व समाज भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया और उपस्थित हजारों माताओं-बहनों को तीजा पर्व की भेंट स्वरूप साड़ियां प्रदान की गईं।
संस्कृति, संस्कार और समरसता का अद्भुत संगम
समारोह को पूरी आत्मीयता से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजा और पोरा तिहार केवल पर्व नहीं हैं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और सनातन संस्कृति के ऐसे मजबूत स्तंभ हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को एकजुट रखते हैं।
- तीजा तिहार (नारी शक्ति का पर्व): मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है— ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’। तीजा हमारी माताओं-बहनों के त्याग, तप और परिवार के प्रति अगाध समर्पण का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा करती हैं और रात्रि जागरण कर लोकगीत गाती हैं।
- पोरा तिहार (कृषि और पशुधन का सम्मान): पोरा पर्व हमारे अन्नदाता किसानों की मेहनत, खेती-किसानी और हमारे मूक पशुधन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पावन अवसर है। यह हमारी कृषि प्रधान संस्कृति की रीढ़ है।
- सर्वसमाज की सहभागिता: मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी समाजों के लोग एक मंच पर एकत्र होते हैं, जो राज्य में आत्मीयता, भाईचारे और समरसता के भाव को और अधिक प्रगाढ़ करता है।
गांव, गरीब, किसान और महिलाओं के कल्याण को समर्पित सरकार
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है:
- महतारी वंदन योजना (आर्थिक संबल): माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। अब तक इसकी 31 किश्तों का सफल भुगतान किया जा चुका है। ग्रामीण महिलाएं इस राशि से किराना एवं सब्जी की दुकानें खोल रही हैं, सिलाई मशीनें खरीद रही हैं और अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत कर रही हैं।
- अन्नदाताओं का सम्मान: छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है। किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है।
- आवास योजना की गति: सरकार गठन के तुरंत बाद पहली कैबिनेट में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे। पिछले दो वर्षों में 11 लाख से अधिक पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं और वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है।
नक्सल मुक्ति, सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नई इबारत
- छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त: मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस व रणनीतिक कौशल के परिणामस्वरुप आज छत्तीसगढ़ लगभग नक्सलमुक्त हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा 15 हजार आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए अलग से आवास स्वीकृत किए गए हैं ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
- पारदर्शी और डिजिटल सुशासन: सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। शासकीय प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाते हुए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई है, जहाँ 8 हजार से अधिक कर्मचारी चौबीसों घंटे नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण कर रहे हैं। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 700 से अधिक सेवाएं नागरिकों के मोबाइल पर उपलब्ध हैं।
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था का सम्मान: छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की मुफ्त यात्रा कराई जा चुकी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के बुजुर्गों को देश के चयनित 31 तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को तीजा-पोरा तिहार की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस गरिमामयी अवसर पर स्थानीय विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री रमेश सिंह ठाकुर, श्री भगतराम हरबंस, श्री चंद्रशेखर शुक्ला, श्री टेकेश्वर चंद्रा, श्री धीरेन्द्र परगनिहा, श्री देवा साहू, श्री ओमप्रकाश मरावी, श्री मनोज जोशी, श्री मैक मिलन साहू सहित ‘मोर माटी सांस्कृतिक संगठन’ के पदाधिकारी और राजधानी के कोने-कोने से पहुंचे हजारों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
“हमारे तीज-त्यौहार हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और एक-दूसरे के करीब लाते हैं। इन अमूल्य परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ी को सौंपना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।” — श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
