सरगुजा एकलव्य विद्यालय मामला: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के तीखे तेवर—”बच्चों को समस्याओं के लिए पैदल निकलना पड़े, यह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं”
मुख्य बातें (Key Highlights):
- प्रशासनिक सनसनी: शिवपुर एकलव्य विद्यालय की छात्राओं के पैदल कलेक्टोरेट पहुँचने के मामले पर मुख्यमंत्री की हाई-लेवल समीक्षा।
- लापरवाहों पर गिरेगी गाज: दोषियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई के निर्देश, कलेक्टर से मांगी गई पूरी रिपोर्ट।
- सिस्टम में कसावट: बिजली, पढ़ाई, मेस और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए तत्काल प्रभाव से एक्शन मोड में जिला प्रशासन।
- भविष्य की हिदायत: आदिवासी अंचलों के आवासीय संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं से खिलवाड़ ناقابل-बर्दाश्त (अस्वीकार्य)।
रायपुर / अंबिकापुर 8 सितम्बर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद संवेदनशील और बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है, जहाँ शिवपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए मजबूरन किताबें छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा और पैदल ही कलेक्टोरेट का रुख करना पड़ा। इस गंभीर घटना ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मामले की नजाकत को भांपते हुए प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया और बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत से फोन पर सीधी चर्चा की।
“यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं”
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कलेक्टर से दो टूक शब्दों में कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी अंचलों के हमारे बच्चे-बच्चियां अपनी पढ़ाई और सुनहरे भविष्य का सपना लेकर इन आवासीय विद्यालयों में रहते हैं। ऐसे में यदि मासूम बच्चियों को अपनी मूलभूत और छोटी-छोटी समस्याओं को हल कराने के लिए विद्यालय से पैदल निकलकर सड़क पर आना पड़े, तो यह व्यवस्था की विफलता है और यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जब विद्यालय में बिजली और अन्य परेशानियां लंबे समय से थीं, तो स्थानीय स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते सुधि क्यों नहीं ली?
जांच और त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाए। इस बात की तह तक पहुँचा जाए कि आखिर प्रशासनिक स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कहाँ और किसकी तरफ से बरती गई। मुख्यमंत्री कार्यालय से यह साफ कर दिया गया है कि इस मामले में जिनकी भी संलिप्तता या उदासीनता सामने आएगी, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
युद्ध स्तर पर दुरुस्त होंगी विद्यालय की व्यवस्थाएं
छात्राओं द्वारा उठाई गई हर एक समस्या पर त्वरित अमल करते हुए मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित मोर्चों पर तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए हैं:
- विद्युत आपूर्ति: विद्यालय परिसर में बिजली की समस्या का तत्काल और स्थायी समाधान।
- स्टाफ और पढ़ाई: शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश।
- मेस और भोजन व्यवस्था: छात्रावास के भोजनालय (मेस) की गुणवत्ता और साफ-सफाई में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने की सख्त हिदायत।
- परिसर स्वच्छता: हॉस्टल परिसर में साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं को युद्ध स्तर पर चाक-चौबंद करना।
संवेदनशील और जवाबदेह हो मैदानी अमला
मुख्यमंत्री श्री साय ने केवल तात्कालिक राहत पर जोर न देते हुए एक ऐसी स्थायी और मजबूत व्यवस्था बनाने को कहा है, जिससे विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण हॉस्टल और स्कूल स्तर पर ही समय रहते हो जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में बच्चों को अपनी फरियाद लेकर खुद प्रशासनिक दफ्तरों तक आने की ऐसी नौबत दोबारा नहीं आनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि राज्य सरकार आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को देश का बेहतर भविष्य बनाने के लिए हरसंभव संसाधन और सुविधाएं मुहैया करा रही है। इन योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों का प्राथमिक दायित्व है। शासन की मंशा बिलकुल साफ है—बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और उनके अधिकारों से खिलवाड़ करने वाला कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बख्शा नहीं जाएगा।
