छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 5 ऐतिहासिक निर्णय: युवाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन’, सरकारी कर्मचारियों की आयु सीमा बढ़कर 45 वर्ष हुई

रायपुर 9 सितम्बर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की अति महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ के भविष्य, युवाओं की तकदीर, ग्रामीण व शहरी अधोसंरचना के विकास और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को लेकर कई दूरदर्शी और क्रांतिकारी निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों से राज्य में रोजगार और उद्यमिता के नए महा-अवसर सृजित होंगे, उद्योग जगत को नई गति मिलेगी और शासकीय सेवकों को आगे बढ़ने के अभूतपूर्व अवसर प्राप्त होंगे।

आइए, इन सभी फैसलों का बिंदुवार विस्तृत और विश्लेषणात्मक विश्लेषण देखते हैं:
1. युवाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी: जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनेंगे युवा
प्रदेश के युवाओं को रोजगार के परंपरागत दायरे से निकालकर उन्हें आत्मनिर्भर, उद्यमी और नवाचार (Innovation) से जोड़ने के लिए मंत्रिपरिषद ने ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ पर मुहर लगा दी है।
- बजट का प्रावधान: इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया है।
- मजबूत ढांचागत विकास: प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र (Entrepreneurship Development Centres) खोले जाएंगे। साथ ही, अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
- NIPUN JOB Engine: इस आधुनिक इंजन के जरिए उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप युवाओं का कौशल विकास किया जाएगा, जिससे उन्हें औपचारिक और उच्च-स्तरीय रोजगार प्राप्त हो सके।
- अंतिम लक्ष्य: इस नीति का मूल मंत्र छत्तीसगढ़ के युवाओं को नौकरी ढूंढने वाला यानी ‘जॉब-सीकर’ के बजाय नौकरी देने वाला यानी ‘जॉब-क्रिएटर’ बनाना है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख स्टार्टअप और तकनीकी हब के रूप में उभरे।
2. ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’: वैश्विक बाजारों तक बढ़ेगी पहुंच
राज्य के स्थानीय उत्पादों, कृषि जिंसों और औद्योगिक वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को स्वीकृति प्रदान की गई है।
- वैश्विक विस्तार: इस नीति का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को भारत के प्रमुख निर्यात केंद्र (Export Hub) के रूप में विकसित करना है।
- मजबूत इकोसिस्टम: इसके तहत राज्य में विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे निर्यातकों को अपने उत्पाद भेजने में आसानी होगी। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित (Value-Added) उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- डिजिटल और वैश्विक मंच: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के छोटे-बड़े उद्यमियों की सीधी पहुंच ग्लोबल मार्केट तक सुनिश्चित की जाएगी, जिससे राज्य के राजस्व और व्यापार में जबरदस्त उछाल आएगा।
3. नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा ‘नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट’ (NSTI)
कौशल और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को एक राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है।
- निःशुल्क भूमि आवंटन: नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को पूरी तरह निःशुल्क आवंटित की गई है।
- लागत और सुविधाएं: लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस विशाल संस्थान में अत्याधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक, प्रशासनिक भवन और सर्वसुविधายुक्त हॉस्टल तैयार किए जाएंगे।
- प्रशिक्षण क्षमता: इस संस्थान में हर साल दीर्घकालिक (Long-term) पाठ्यक्रमों के तहत 1,000 और अल्पकालिक (Short-term) कार्यक्रमों के तहत 3,000 युवाओं को आज के आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे नवा रायपुर देश के तकनीकी शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगा।
4. प्रशासनिक सेवा के कर्मियों के लिए बड़ी सौगात: आवेदन की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़कर 45 वर्ष
राज्य शासन के अधीन अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को बड़ा संबल प्रदान करते हुए मंत्रिपरिषद ने नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया है।
- किसे मिलेगा लाभ: राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी व अस्थायी शासकीय सेवक, निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारी, संविदाकर्मी और नगर सैनिक (Home Guards) अब अन्य उच्च पदों व शासकीय सेवाओं के लिए अधिक आयु तक आवेदन कर सकेंगे।
- बढ़ी हुई सीमा: इन सभी श्रेणियों के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी गई है।
- समान अवसर: इस निर्णय से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को अपनी योग्यता के बल पर उच्च पदों तक पहुँचने और करियर में आगे बढ़ने के समान व बेहतरीन अवसर मिल सकेंगे। इस संबंध में शासन द्वारा जल्द ही एकीकृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
5. दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त
न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत और जनोपयोगी बनाने के लिए दुर्ग जिले में एक अत्याधुनिक न्यायालय परिसर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
- भूमि व्यवस्था: दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के लिए ग्राम तितुरडीह (बीआईटी कॉलेज के समीप) में 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
- भूमि की अदला-बदली: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के नाम दर्ज इस भूमि के एवज में ग्राम पाहंदा (तहसील पाटन) की 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी (दोनों भूखंडों का वित्तीय मूल्य लगभग समान है)।
- न्यायिक सुधार: इस अदला-बदली से दुर्ग में एक भव्य, आधुनिक और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे आम जनता को त्वरित और सुगम न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
